हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। विश्व हीमोफीलिया दिवस सोमवार को है। हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जिससे ग्रसित व्यक्ति को यदि एक बार खून निकलना शुरू हो जाए तो फिर उसका खून बिना इंजेक्शन लगवाए नहीं रुक पाता है। इस इंजेक्शन की कीमत करीब 5 हजार रुपये है। जिले में भी ऐसे कई मरीज हैं जो कि इस बीमारी से ग्रसित हैं। इनमें से ही एक मयंक सिंघल है। जोकि इस बीमारी में तिल-तिल कर जी रहा है। स्वास्थ्य विभाग हीमोफीलिया दिवस मनाएगा। तमाम संस्थाएं भी इसमें सहभागिता करेंगी लेकिन किसी के पास मयंक सिंघल की इस बीमारी का उपचार नहीं है। अंबाखार निवासी मयंक के पिता आनंद कुमार सिंघल मजदूरी करते हैं। यहां वो किराए पर रहते हैं। आर्थिक बदहाली से जूझ रहा मयंक अपने बालपन से ही इस बीमारी से ग्रसित है। इंजेक्शन की कीमत रियायती दर पर करीब 5 हजार रुपये है। एक माह में इसे दो से तीन इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। वहीं यदि उसके शरीर से रक्त निकलना शुरू हो जाए तो फिर डॉक्टर को भी पता नहीं होता कि कितने इंजेक्शन लगेंगे। यह इंजेक्शन सिर्फ दिल्ली स्थित हीमोफीलिया सोसाइटी में मिलता है। स्वास्थ्य विभाग के पास भी यह मौजूद नहीं रहता है। ऐसे में गरीबी का श्राप मयंक की जिंदगी के लिए नासूर बनता रहा है। मयंक के पिता जो भी कमाते हैं अपने बेटे के इंजेक्शन पर खर्च करना पड़ता है। इंजेक्शन के लिए मयंक की मां व बहन को भी काम करना पड़ता है। मयंक को अपनी इस बीमारी के चलते खस्ताहाल हुई आर्थिक के चलते मयंक को अपनी पढ़ाई भी बीच में ही छोड़नी पड़ी। मयंक ने दसवीं करने के बाद पॉलीटेक्निक कोर्स में प्रवेश लिया लेकिन फीस की व्यवस्था न होने से पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। फिर इंटरमीडिएट किया। अब हाल ही में लक्ष्मीनगर तिराहा पर अपनी फूड शॉप शुरू की है। ताकि अपने लिए इंजेक्शन की व्यवस्था कर सके। बीमारी और आर्थिक बदहाल से जूझ रहे मयंक सिंघल को हर माह कम से कम 2 से 3 इंजेक्शन चाहिए। इसके लिए मयंक के पिता को कई बार कर्ज तक लेना पड़ा है। ऐसे में समाजसेवी संस्थाएं चाहें तो मयंक सिंघल की सहायता कर सकती हैं। जिले में हीमोफीलिया बीमारी से पीड़ित करीब 20 लोग हैं। जो कि हर माह इंजेक्शन लगवाने के लिए सहारा ढूंढते हैं। अन्यथा की स्थिति में कर्ज लेकर इंजेक्शन लगवाना पड़ता है।
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Author: Vijay Singhal
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