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भाजपा ने वैश्य पर लगाया दांव, विनोद अग्रवाल बने महापौर उम्मीदवार

ByVijay Singhal

Apr 17, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। भाजपा ने विनोद अग्रवाल पर महापौर पर दांव खेला है। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भाजपा ने मथुरा-वृंदावन नगर निगम के लिए रविवार को अपने पत्ते खोल दिए हैं। महापौर के लिए पार्टी ने विनोद अग्रवाल को अपना प्रत्याशी बनाया है। इसके माध्यम से भाजपा ने जाट, ठाकुर और ब्राह्मणों के बाद अब वैश्यों को साधने की कोशिश की है। मथुरा-वृंदावन नगर निगम को ब्राह्मण और वैश्य बाहुल्य कहा जाता है। इसी के दृष्टिगत शुरूआत से ही संभावना व्यक्त की जा रही थी शहर में ब्राह्मण विधायक होने पर अब महापौर का पद वैश्य के खाते में गया। इसी दृष्टि से भाजपा ने रविवार को देर शाम महानगर अध्यक्ष विनोद अग्रवाल को उम्मीदवार घोषित किया है। हालांकि भाजपा में महापौर की दावेदारी का पेच इस कदर उलझ गया था कि जनपद स्तर पर संगठन पैनल भी तय नहीं कर सका। 15 दावेदारों के नाम प्रदेश संगठन को भेज दिए गए। इसमें अधिकांश दावेदार वैश्य ही थे, जिसमें विनोद अग्रवाल की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही थी। कई दावेदारों ने तो टिकट से पहले ही नामांकन पत्रों की खरीद भी कर ली है। रविवार को भाजपा ने इस असमंजस्य पर विराम लगाते हुए विनोद अग्रवाल के नाम की घोषणा कर दी है। अब वे सोमवार को नामांकन किया। भाजपा ने महापौर से पहले नगर निगम पार्षदों के उम्मीदवारों के नाम की घोषणा पहले की। सभी 70 वार्ड में पार्टी ने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं। इसमें अधिकांश वार्ड में उम्मीदवारों में परिवर्तन किया है। बहुत कम निवर्तमान उम्मीदवारों को एक बार फिर प्रत्याशी बनाया गया है। नए चेहरों पर दाव लगाया गया है। 15 नामों का पैनल हाईकमान को भेजा था।गत दिनों जिले के प्रभारी मंत्री संदीप सिंह और एमएलसी माहेश्वरी के सानिध्य में हुई बैठक में पंद्रह नामों का पैनल हाईकमान को भेजा गया था। इसमें ब्राह्मण और वैश्य समाज के प्रत्याशियों में पाले खिंचे हुए थे। करीब आठ नाम वैश्य समाज से भेजे गए थे जबकि छह नाम ब्राह्मण समाज के पैनल में शामिल थे। इन नामों पर विचार करने में पार्टी हाईकमान को दो दिन लग गए। पिछले दो दिन से कार्यकर्ताओं में महापौर पद के प्रत्याशी को लेकर उत्सुकता बनी हुई थी। विनोद अग्रवाल के नाम पर पार्टी और संगठन की मुहर लगना बाकी था, उनका नाम महापौर पद के लिए हाईकमान ने पहले ही तय कर लिया गया था। वह केवल असंतुष्ट नेताओं को साधने के लिए इसमें देरी कर रहा था, ताकि सभी को तर्कों सहित संतुष्ट किया जा सके। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विनोद अग्रवाल ने महापौर पद के लिए दो दिन पूर्व ही पर्चा खरीद लिया था।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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