हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के बलदेव में दाऊजी महाराज मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी। अगले दिन नंदोत्सव होगा। दोनों ही कार्यक्रम कोर्ट कमिश्नर की देखरेख में होंगे। खास बात यह है कि दाऊजी महाराज तथा माता रेवती देवी के शृंगार को खजाने से आभूषण भी कोर्ट कमिश्नर की देखरेख में निकाले जाएंगे। इसकी वीडियोग्राफी की जाएगी। एडीजे-5 डाॅ. पल्लवी अग्रवाल की अदालत ने यह फैसला दिया है। कार्यवाहक रिसीवर कुमरपाल सिंह तोमर ने एडीजे पंचम की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें प्रार्थना की थी की बलदेव के दाऊजी महाराज मंदिर में 26 अगस्त को जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाना प्रस्तावित है, जिसके अनुसार नंदोत्सव दधिकान्या नंदोत्सव 27 अगस्त को मनाया जाएगा। उक्त उत्सव के दौरान दाऊजी महाराज और रेवती मैया मंदिर के खजाने में रखे आभूषण धारण कराए जाते हैं। डबल लॉक की चाबी न्यायालय की अभिरक्षा में है। मंदिर का खजाना खुलवाया जाए।
इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया है कि 26 अगस्त की रात्रि 11.00 बजे मंदिर में डबल लॉक में स्थित दिव्य आभूषण निकाले जाएंगे, जो कि 26/27 की मध्य रात्रि में ठाकुर श्री दाऊजी महाराज एवं रेवती मैया को धारण कराए जाएंगे। 27 अगस्त को दोपहर 12.00 बजे तक इनको प्रभु व माता धारण करेंगी। कोर्ट कमिश्नर कनिष्ठ लिपिक अनुराग सिंह को ठाकुर दाऊजी महाराज एवं माता रेवती देवी विराजमान कस्बा बल्देव को जन्माष्टमी के अवसर पर शृंगार के लिए आभूषण डबल लॉक से निकालकर धारण कराने के लिए न्यायालय आयुक्त के रूप में नियुक्त किया है। उनके सहायक के रूप में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अवनीश उपाध्याय, विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट शैलेन्द्र गौतम को उपस्थित रहने के लिए निर्देशित किया है। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि रिसीवर व सेवायतों की उपस्थिति में डबल लॉक से आभूषण निकलवाएं। उसकी सूची तैयार करें। रिपोर्ट तैयार कराएं एवं ठाकुर दाऊजी महाराज तथा माता रेवती देवी मंदिर के खजाने से आभूषण निकालते तथा धारण कराते समय और आभूषणों को रखते समय वीडियोग्राफी कराई जाए। वीडियोग्राफी का रिकॉर्ड न्यायालय में जमा कराएं। कार्यक्रम समाप्ति के बाद ठाकुर दाऊजी महाराज व माता रेवती को धारण कराए गए आभूषणों को मिलान कर सूची तैयार करें व आभूषणों को रिसीवर, सेवायतों की उपस्थिति में डबल लॉक में जमा कराकर डबल लॉक की चाबी न्यायालय में पेश की जाए।
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Author: Vijay Singhal
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