हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह को लेकर चल रहे विवाद में अब कटरा केशवदेव में पूर्व में खोदाई में निकली मूर्तियां भी श्रीकृष्ण जन्मस्थान होने की गवाही देंगी। जिस स्थान पर अभी श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह स्थित है, उसे कटरा केशवदेव क्षेत्र कहते हैं। पहले इस स्थान पर केशवदेव मंदिर था। पूर्व में इस क्षेत्र की कई बार खोदाई की गई, इसमें बड़ी मात्रा में मूर्तियां निकलीं। हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां खोदाई में मिलने का प्रमाण प्रस्तुत कर कोर्ट को यह बताया जाएगा कि यहीं श्रीकृष्ण जन्मस्थान था। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह को लेकर कई वर्षों से विवाद चल रहा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के पक्षकारों ने वर्ष 2020 में न्यायालय में इसे लेकर वाद दायर किया था। अब तक 18 से अधिक वाद दायर हो चुके हैं। इस मामले की सुनवाई अब इलाहाबाद हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए वादी दस्तावेज जुटा रहे हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान जिस स्थान पर स्थित है, उसे कटरा केशवदेव क्षेत्र कहते हैं। इस क्षेत्र में समय-समय पर हुई खोदाई में बड़ी संख्या में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां मिली हैं। इनमें कई मूर्तियां राजकीय संग्रहालय में आज भी सुरक्षित हैं। इस मामले के एक वादी श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह इन हिंदू देवताओं की मूर्तियों को साक्ष्य के रूप में हाई कोर्ट में प्रस्तुत करेंगे। यहां से कुषाण काल में निर्मित भगवान कार्तिकेय और अग्निदेव की मूर्तियां मिलीं। कार्तिकेय हाथ में भाला लिए हैं। अग्निदेव उनके साथ खड़े हैं। इसी तरह गुप्तकालीन वैष्ण मंदिर का कलात्मक द्वार स्तंभ भी मिला। इसमें अधोभाग में देवी गंगा अपने वाहन मकर पर अपने दाहिने हाथ पर घट लिए हुए सवार हैं। इसी तरह गुप्तकालीन विश्वरूप विष्णु और ऋषभनाथ की मूर्ति भी है। नदी देवी की मूर्ति भी खोदाई में मिली। महेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि इन मूर्तियों के चित्र इलाहाबाद हाई कोर्ट में जन्मस्थान के प्रमाण होने के रूप में प्रस्तुत किए जाएंगे। हाई कोर्ट को हम बताएंगे कि जब खोदाई में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्ति मिलीं तो फिर शाही मस्जिद ईदगाह कहां से आ गई। हाई कोर्ट में 15 मई को इस मामले में सुनवाई होगी।
