हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। गोवर्धन के ब्लॉक ग्राम पंचायत पलसों ने विकास निधि की राशि से मदरसे में कमरा निर्माण करा दिया है। इसकी जानकारी पर पंचायत सचिव और प्रधान को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। वहीं वर्तमान सचिव एवं प्रधान मामले को दबाने के लिए इस बारे में पूरी तरह अनभिज्ञता जता रहे हैं। यहां गौरतलब है कि इस ग्राम पंचायत में समुदाय विशेष के 30 घर हैं। जिले के गोवर्धन ब्लॉक की ग्राम पंचायत पलसों के मजरा रामकिशन में मदरसा संचालित है। इस मदरसे में ग्राम पंचायत ने एक कमरा निर्माण एवं मरम्मत कार्य कराया है। इसके लिए पूर्व ग्राम पंचायत सचिव मनीता मीणा ने ग्राम पंचायत की विकास निधि से भुगतान किया है। उन्होंने ग्राम पंचायत को 15वें वित्त आयोग से मिली निधि से मदरसे में कमरा निर्माण एवं मरम्मत कार्य के लिए 591149 रुपए का भुगतान 24 फरवरी 2024 को किया था। जबकि विकास निधि की धनराशि किसी भी धार्मिक शिक्षण संस्थान में व्यय नहीं की जा सकती है। इसकी जानकारी होने पर सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) गोवर्धन राज बहादुर सिंह ने तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव मनीता मीणा एवं ग्राम प्रधान सतीश चन्द्र को 18 नवंबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें उन्होंने राज्य एवं केन्द्र सरकार की गाइडलाइनों के विरुद्ध धार्मिक शिक्षण संस्थान में निर्माण कार्य की एवज में किए भुगतान को पंचायती राज एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव मनीता मीणा एवं प्रधान सतीश चन्द्र से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब न देने पर जांच कमेटी गठित कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। वर्तमान ग्राम पंचायत सचिव भुवनेश कुमार पिछले छह माह से भी अधिक समय से यहां तैनात हैं। इसके बावजूद उन्हें ग्राम पंचायत के कार्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वह मामले को दबाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं। उनसे जब इस बारे में जानकारी की गई तो उन्होंने ऐसे किसी भी भुगतान एवं निर्माण कार्य के बारे में पूरी तरह अनभिज्ञता जता दी। वहीं ग्राम प्रधान सतीश चन्द्र भी इस मामले को गलत बता रहे हैं। राज बहादुर सिंह, एडीओ (पंचायत) ने कहा, ग्राम पंचायत पलसों के मजरा नगला रामकिशन में मदरसे में कमरा निर्माण एवं मरम्मत पर 15वें वित्त आयोग की निधि से 5.91 लाख रुपए भुगतान करने पर तत्कालीन पंचायत सचिव एवं प्रधान से स्पष्टीकरण मांगा है। विकास निधि धार्मिक संस्थान में व्यय करना केन्द्र व राज्य सरकार के नियमों के विरुद्ध है।
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Author: Vijay Singhal
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