हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन के आश्रम में रहने वाली मां की मौत की खबर के बाद तिहाड़ जेल से बेटी मुखाग्नि देने पहुंची। वो बैंक फ्राड में जेल में बंद थी, पश्चिम बंगाल के इस परिवार में बेटी के जेल जाने के बाद मां वृंदावन आ गई थी। मोक्ष धाम पर मां का अंतिम संस्कार किया गया। उम्र के आखिरी पड़ाव में बुजुर्ग मन को शांति और शरीर को भगवान के चरणों में समर्पित करने के लिए वृंदावन आते हैं। मोक्ष की कामना लिए वृंदावन आ कर रहने वाले इन बुजुर्गों में से अधिकांश के मन में कहीं न कहीं परिवार की याद रहती है। वह सोचते हैं की मृत्यु होने पर परिवार का कोई सदस्य अंतिम संस्कार कर दे। वृंदावन के परिक्रमा मार्ग स्थित श्याम कुटी के पास रहने वाले ब्रज नंदन शुक्ला के यहां पश्चिम बंगाल निवासी 67 वर्षीय बुजुर्ग कल्पना मुखर्जी रहती थीं। रविवार को कल्पना जब कमरे से नहीं निकली तो ब्रज नंदन की छोटी बेटी ने जाकर कमरे में देखा । जहां कल्पना जमीन पर पड़ी हुई थीं और उनकी मृत्यु हो चुकी थी। कल्पना करीब 4 साल से ब्रज नंदन शुक्ला के यहां रह रही थीं। कल्पना के कोई बेटा नहीं था केवल एक बेटी थी और वह भी उनके जीवन के अंतिम पड़ाव में तिहाड़ जेल में निरुद्ध है। कल्पना मुखर्जी के पति जयंत मुखर्जी एक बैंक में मैनेजर थे। पति की मृत्यु के पश्चात कल्पना की बेटी विश्वेशरी मुखर्जी को नौकरी मिल गई। पहले वह कोलकाता में पोस्टेड रहीं इसके बाद दिल्ली ट्रांसफर हो गया। विश्वेशरी क्लर्क की पोस्ट पर थीं। बैंक में बाउचर में हेरा फेरी के मामले में उनको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और पिछले करीब 4 महीने से तिहाड़ जेल में हैं। कल्पना मुखर्जी की मृत्यु की जानकारी मकान मालिक ने वृंदावन पुलिस को दी। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया। सोमवार को कल्पना का पोस्ट मार्टम हुआ। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार कौन करेगा यह सवाल खड़ा हुआ। पुलिस ने मकान मालिक से लेकर सबसे पहले बैंगलूरू में रह रहे धेवते को फोन किया। कल्पना का लगाव अपनी बेटी के बेटे से ज्यादा था। मकान मालिक को भरोसा था की धेवता आ कर कल्पना का अंतिम संस्कार कर देगा। इसीलिए उन्होंने पुलिस को उसका नंबर दिया। लेकिन धेवते ने अपनी व्यस्तता बताते हुए अंतिम संस्कार करने वृंदावन आने से इंकार कर दिया। धेवते के अंतिम संस्कार करने से मना करने के बाद कल्पना की बेटी को संपर्क करने का प्रयास किया गया। इसके लिए दिल्ली में उनके वकील को फोन लगाया गया। वकील ने कल्पना की मृत्यु की सूचना तिहाड़ जेल में निरुद्ध बेटी को दी। मां की मृत्यु होने के जानकारी मिलते ही बेटी की आंखों से आंसू निकल पड़े। बेटी ने तत्काल न्यायालय से मां का अंतिम संस्कार करने की अनुमति मांगी। न्यायालय ने मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी। जिसके बाद दिल्ली पुलिस कड़ी सुरक्षा में बेटी को लेकर वृंदावन मोक्ष धाम पहुंची। दिल्ली पुलिस की कस्टडी में मोक्ष धाम पहुंची बेटी ने कफन में लिपटी मां के अंतिम दर्शन किए। इस दौरान उनकी आंख में आंसू थे तो दिल में मां की मृत्यु का गम। बेटी ने दिल पर पत्थर रखकर मां के शव को चिता पर रखवाया और फिर विधि विधान से उनको परिक्रमा देने के बाद मुखंगनी दी। बेटी का मां के प्रति प्रेम देखकर मोक्ष धाम पर मौजूद हर किसी की आंख नम हो गई।
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Author: Vijay Singhal
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