हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। छावनी क्षेत्र अंतर्गत पॉश कॉलोनी मोतीकुंज एक्सटेंशन में शेरशाह सूरी द्वारा बनवाई गई करीब 400 साल पुरानी कोस मीनार मिली है, जिसके पास बनी सैय्यद मज़ार पर कमरे का निर्माण कर छुपा दिया गया था। इसकी जमीन पर कब्जे की कोशिश को देखते हुए स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों ने इसका मौका मुआयना किया। कोस मीनार का इस्तेमाल शेरशाह सूरी के शासनकाल में सड़कों को नियमित अंतराल पर चिह्नित करने के लिए किया जाता था। जीटी रोड की तरह अन्य मुख्य मार्गों के किनारे हर कोस पर मीनारें बनवाई गई थीं। कई मीनारें आज भी सुरक्षित हैं, जिनकी देखभाल पुरातत्व विभाग करता है, लेकिन कई अतिक्रमण का शिकार हो गईं। मोतीकुंज एक्सटेंशन की सैय्यद वाली गली के अंतिम छोर पर सैय्यद मजार बनी है। इसी के साथ एक कमरा भी बना है। इसके पीछे करीब एक हजार वर्ग गज जमीन है, जिसमें कोस मीनार स्थित है। आसपास भवन होने के कारण आम तौर पर यह धरोहर बाहर से लोगों को नजर नहीं आती है। पिछले काफी समय से सैय्यद मजार पर सेवा कर रहा परिवार अब पीछे की जमीन पर भी निर्माण करने की कोशिश कर रहा था। इसकी शिकायत राम मूरत उपाध्याय ने मुख्यमंत्री पोर्टल और पुरातत्व विभाग से की। ऐतिहासिक धरोहर पर कब्जे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। कोस मीनार पर 1928 का एक बोर्ड भी लगा है। माना जा रहा है कि यह मीनार करीब 400 साल पुरानी है, जिसे शेरशाह सूरी के शासन काल में बनाया गया।
निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों ने सैय्यद मजार और उसके पास कमरा बनाकर रह रहे परिवार को संरक्षित स्थल को खाली करने के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि कोस मीनार पूर्व में मिर्जापुर ग्राम पंचायत का हिस्सा थी, जिसकी पैमाइश खतौनी में 0.0810 हेक्टेयर है। अब यह भूमि छावनी परिषद के अंतर्गत आती है। पूर्व में यहां यादव परिवारों के पूर्वजों के थान बने हुए हैं। एसडीएम सदर अजय जैन ने बताया कि उन्होंने इस स्थल का निरीक्षण किया है। यह जमीन थान सैय्यद के नाम पर दर्ज है। इधर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के स्थानीय अधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि कोस मीनार ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका संरक्षण किया जाएगा।
निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों ने सैय्यद मजार और उसके पास कमरा बनाकर रह रहे परिवार को संरक्षित स्थल को खाली करने के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि कोस मीनार पूर्व में मिर्जापुर ग्राम पंचायत का हिस्सा थी, जिसकी पैमाइश खतौनी में 0.0810 हेक्टेयर है। अब यह भूमि छावनी परिषद के अंतर्गत आती है। पूर्व में यहां यादव परिवारों के पूर्वजों के थान बने हुए हैं। एसडीएम सदर अजय जैन ने बताया कि उन्होंने इस स्थल का निरीक्षण किया है। यह जमीन थान सैय्यद के नाम पर दर्ज है। इधर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के स्थानीय अधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि कोस मीनार ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका संरक्षण किया जाएगा।
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Author: Vijay Singhal
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