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आम आदमी और उसकी तानाशाह सरकार

ByVijay Singhal

May 8, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। आम आदमी पार्टी कि सरकार पहले दिल्ली में थी तो चूंकि पुलिस उसके हाथ में नहीं थी इसलिए वह परेशान थी फिर भी आम आदमी पार्टी के नायक आम आदमी केजरीवाल को पत्रकारों के खिलाफ अपने वाउंसरों से काम चलाना पड़ता था जो वास्तव में उनकी मजबूरी थी और हम इस बात को समझ सकते हैं। परंतु जब पंजाब में उनकी सरकार आई तो सभी कुछ उनके हाथ में था और है केजरीवाल जो कहा करते थे मैं तो बस दो कमरे के फ्लैट में ही रहकर गुजारा कर लूंगा क्योंकि मुझे उन लोगों को देखकर बहुत कष्ट होता है जो झुग्गी झोपड़ी में रह रहे हैं और जिनके पास पैर फैलाने की जगह तक नहीं है मैं कोई भी बड़ा बंगला नहीं लूंगा ऐसा उन्होंने अपने हलफनामे में भी कहा है परंतु मिजाज कद और पद के हिसाब से बदलता रहता है अब तो साहब आम आदमी के नाम पर एक बुरा सपना बनकर रह गए हैं। टाइम्स नाउ नवभारत ने जब अरविंद केजरीवाल के शीश महल का गुणगान करना शुरू किया तो शायद वह पचा नहीं पाए और टाइम्स नाउ नवभारत के पत्रकारों से दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हो गए इसी का नतीजा है कि लुधियाने में भावना किशोर को बिना किसी जुर्म मनगढ़ंत आरोप में थाने में निरुद्ध करके रखा गया सबसे बड़ी बात यह है कि देश के कानून के हिसाब से यदि उनका कोई जुर्म था तो उनके ड्राइवर को उस जुल्म के लिए निरुद्ध किया जाना चाहिए परंतु आम आदमी पार्टी की सरकार को तो पत्रकार से खुन्नस था इसलिए पत्रकार को ही अपराधी बना दिया और देश के सारे कानून को ताक पर रखते हुए पत्रकार को रात्रि के वक्त भी निरुद्ध रखा गया जो पूरी तरीके से गैरकानूनी होने के साथ-साथ निंदनीय है केजरीवाल आम आदमी से कब खास आदमी बन गए यह तो हम पत्रकार अभी तक समझ ही नहीं पाए खैर कुछ भी हो हम एक जिम्मेदार पत्रकार और एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते इस घटना की निंदा करते हैं और अदालतों को अपना फर्ज याद दिलाना चाहते हैं जो आतंकवादियों के लिए रात को 2:00 बजे खुल जाते हैं और बिना किसी रिपोर्ट के केस का संज्ञान ले लेते हैं क्या वह अदालतें भावना किशोर के साथ कुछ सहानुभूति रखती हैं और क्या स्वत संज्ञान लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ देश का कानून तोड़ने के एवज में कोई कार्यवाही करती हैं।
मित्रों हमारे लिए सबसे बड़ी परेशानी यही है की हम आज भी छोटे बड़े प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सोशल मीडिया पोर्टल आदि आदि बातों को लेकर आपस में उठापटक कर रहे हैं और यही कारण है कि हमारा वजूद आज खतरे में हैं। मुझे लगता है अब पत्रकारों को यदि और बुरे दिन नहीं देखने हैं तो चेत जाना चाहिए और एक होकर अपनी लड़ाई लड़ने के लिए हुंकार भर देना चाहिए आज अगर हम एक होते तो पूरे देश में एक साथ भावना किशोर की समस्या को लेकर हल्ला बोल देते और शायद उसका परिणाम यह होता की गूंगी और बहरी सरकार के कानों तक हमारी आवाज पहुंचती और वह हमारी एकता को देखकर हमारे हित में कार्य करने के लिए मजबूर हो जाती आज जबकि हम करोड़ों में है परंतु अपने दाएं बाएं देखिए क्या कोई आपके साथ हैं हो भी कैसे जब हम किसी के साथ नहीं हैं तो कोई हमारे साथ कैसे होगा। मित्रों यह हमारे लिए बहुत बड़ी समस्या है भावना किशोर एक बड़े चैनल की पत्रकार हैं और आज उस चैनल ने और हम पत्रकारों ने पंजाब सरकार को और देश की व्यवस्था को इतना झकझोर कर रख दिया है कि वह तो छूट जाएंगी, कल्पना कीजिए उनकी जगह यदि आप होते तो क्या होता। हम अगर एक नहीं होंगे तो एक-एक करके तोड़ दिए जाएंगे बिखेर दिए जाएंगे और हमारी मंजिल हमारे लिए स्वप्न मात्र रह जाएगी। इसलिए आज से ही कसम लीजिए की अपनी सक्रिय भागीदारी निभाते हुए अपने को एवं संगठन को मजबूत करेंगे ताकि हम अपनी लड़ाई खुद लड़ सके और किसी के मोहताज न हो।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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