हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। जिलेभर में धान कटाई के बाद कृषि उत्पादन समिति मंडी में किसान बिक्री को फसल लेकर पहुंचने लगे हैं। एमएसपी से अधिक दाम मिलने से किसान फसल आढ़तियों के यहां बेचकर नकद भुगतान ले रहे हैं जबकि सरकारी धान क्रय केंद्र सूने पड़े हैं। केंद्र प्रभारी किसानों के आने का इंतजार कर रहे हैं। मंडी में बृहस्पतिवार शाम तक 50 से 55 हजार बोरियों की आवक हुई। जिससे परिसर में धान ही धान नजर आया। किसान सरकारी केंद्र पर नहीं आढ़तियों के यहां बेच रहे हैं। केंद्र सरकार ने 2024-25 में धान सामान्य किस्म के लिए 2300 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए के लिए 2320 रुपये का एमएसपी तय किया है। मंडी में आढ़ती अच्छी क्वालिटी का धान 2400 से लेकर 2700 रुपये तक और ग्रेड ए 2951 रुपये क्विंटल खरीद रहे हैं। जो एमएसपी से ज्यादा है।
जिले में किसानों ने धान की फसल 52 हजार हेक्टेयर में बोई। मंडी समिति परिसर में 180 आढ़तियों की दुकानों पर धान के ढेर लगे हैं लेकिन सरकारी केंद्र का काटा सूना पड़ा है। फरह शाहपुर के किसान अनूप सिंह ने बताया कि उनका धान 2550 रुपये क्विंटल बिका है। इस बार अच्छा भाव मिलने से उन्होंने पहले ही फसल बिक्री कर दी। मांट निवासी ओमप्रकाश ने बताया कि मंडी में जगह कम होने से धान बेचने के लिए इंतजार करना पड़ा। मंडी आढ़ती रूप सिंह ने बताया कि धान रखने के लिए जगह नहीं मिल रही है। मंडी में गोदाम के लिए जगह नहीं है। प्रतिदिन किसानों की संख्या बढ़ती जा रही है। आढ़तियां सड़क पर ही धान की तुलाई कर रहे हैं। सरकारी केंद्रों पर शुरू नहीं हुई खरीद डिप्टी आरएमओ संतोष यादव ने बताया कि जिले में धान खरीद के लिए कुल 18 केंद्र निर्धारित हैं। इनमें 10 केंद्र विपणन शाखा और 4 केंद्र प्रदेश कोऑपरेटिव फेडरेशन और 4 केंद्र प्रदेश कोऑपरेटिव यूनिट के खोले गए हैं। सामान्य धान की खरीद 2300 प्रति क्विंटल, जबकि ग्रेड ए धान की खरीद 2320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। इस बार धान खरीद का 3 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य मिला है। सरकार सामान्य धान खरीदती है, जो जिले में 2 से 3 प्रतिशत होता है। खरीद दिवाली तक शुरू हो जाएगी। बेहतर क्वालिटी का धान महंगा होने से किसान आढ़त पर ले जाते हैं। राजेंद्र सिंह, मंडी सचिव कृषि उत्पादन समिति मथुरा ने कहा मंडी में धान की खरीद शुरू हो गई है, किसान फसल बेचने आने लगे हैं। जगह कम पड़ रही है। इसलिए थोड़ी समस्या आती है। दो सरकारी धान केंद्र भी परिसर में खुले हैं लेकिन अभी उनपर किसानों ने आना शुरू नहीं किया।
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Author: Vijay Singhal
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