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फरह के वेटलैंड जोधपुर झाल में हो रहा प्रजनन, कछुए की मिलीं तीन दुर्लभ प्रजातियां

ByVijay Singhal

May 20, 2026
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल

मथुरा। फरह क्षेत्र स्थित जोधपुर झाल वेटलैंड से जैव विविधता के संरक्षण को लेकर एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। वन्यजीव विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने इस वेटलैंड में कछुओं की तीन प्रमुख प्रजातियों की उपस्थिति रिकार्ड की है। इन प्रजातियों में इंडियन फ्लैपशेल टर्टल, स्पाटेड पांड टर्टल और इंडियन रूफ्ड टर्टल शामिल हैं। बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी के ईकोलाजिस्ट डा. केपी सिंह ने बताया कि वेटलैंड को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने में इन कछुओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ये कछुए जल में मौजूद मृत जीवों, सड़े-गले पौधों को खाकर पानी को साफ रखते हैं। इससे पानी में हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पनपते हैं। शैवाल और जलीय खरपतवार को नियंत्रित कर ये पानी में आक्सीजन के स्तर को बनाए रखते हैं। बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय की शोधार्थी निधि यादव के अनुसार कछुए जलीय कीटों और घोंघों की आबादी को नियंत्रित करते हैं। साथ ही इनके अंडे और छोटे बच्चे बड़े पक्षियों व जीवों का भोजन बनते हैं, जिससे खाद्य शृंखला सुचारू रूप से चलती है। इंडियन फ्लैपशेल टर्टल: इसे हिंदी में सुंदरी कछुआ कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम लिसेमिस पंक्टाटा है। यह आइयूसीएन की रेड डाटा बुक मे वल्नरेविल प्रजाति के रूप में दर्ज है। स्पाटेड पांड टर्टल: इसका हिंदी नाम चित्तीदार कछुआ व कूर्म है। वैज्ञानिक नाम जियोक्लेमिस हैमिल्टोनी है। आइयूसीएन स्थिति में यह एनडेंजर्ड प्रजाति के रूप में दर्ज है। इंडियन रूफ्ड टर्टल: इसे हिंदी में तिलहारा या चंदन कछुआ कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम पंगशुरा टेक्टा है। आइयूसीएन संरक्षण स्थिति वल्नरेविल है।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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