हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। ईदगाह के मालिकाना हक के कागजातों के बिना वह वक्फ बोर्ड में कैसे दर्ज हो गई। यह सवाल श्रीकृष्ण जन्मस्थान संबंधी योगेश्वर ट्रस्ट की ओर से किए गए दावे के पक्षकार एडवोकेट अजय प्रताप सिंह ने उठाए हैं। उन्होंने इस संबंध में वक्फ के अधिकारियों को पत्र लिखा है और वक्फ में रजिस्ट्रेशन के समय ईदगाह के पदाधिकारियों द्वारा दाखिल किए गए कागजातों की मांग की है।
अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने पहले इस संबंध में 21 फरवरी 2023 को मुख्यमंत्री कार्यालय से आरटीआई में जवाब मांगा था। जहां से उनका आरटीआई प्रश्न 23 फरवरी को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को स्थानांतरित कर दिया गया। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा एक मार्च को जवाब दिया कि इस संबंध में सर्वे आयुक्त वक्फ द्वारा सीधे पत्राचार करके जानकारी की जा सकती है। इस जवाब के बाद पक्षकार अधिवक्ता ने एक पत्र वक्फ बोर्ड के सर्वे आयुक्त को लिखा है, जिसमें वक्फ में रजिस्टर्ड होते समय दिए गए मालिकाना हक के कागजातों की जानकारी चाही है। उन्होंने इस पत्र की प्रति संबंधित अन्य अधिकारियों को भी भेजी है। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व एक आरटीआई के प्रत्युत्तर में जानकारी मिली है। जिससे पता लगा है कि ईदगाह के रजिस्ट्रेशन के समय कोई भी जमीन का मालिकाना हक का कागजात नहीं दिया गया है और न ही अभी तक इसका सर्वे ही किया गया है। उनका आरोप है कि जब सर्वे ही नहीं किया गया है तब ईदगाह वक्फ बोर्ड की संपत्ति कैसे बन गई वह इसे लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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Author: Vijay Singhal
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