हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। अचानक मौसम में आए बदलाव से इसका असर गेहूं की फसल पर पड़ रहा है। तेज धूप के साथ अधिकतम तापमान काफी बढ़ गया है। फरवरी में मार्च के जैसे तापमान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। न्यूनतम तापमान न तो 9 डिग्री सेल्सियस या इससे कम है और न सर्दी पड़ रही है। मौसम को देखते हुए किसानों को अपनी गेहूं की फसल को लेकर चिंता सताए जा रही है। इस तरह के मौसम में गेहूं की फसल में पैदावार कम होगी।
जिले में इस साल गेहूं की बुवाई 1 लाख 88 हजार हेक्टेयर से अधिक में हुई है। किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल को ठंडे वातावरण की जरूरत होती है। ऐसे में वर्तमान मौसम की गर्मी को देखते हुए अंदेशा है कि गेहूं उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है। किसान फूलचंद शर्मा का कहना है कि ठंड के साथ मौजूदा समय में शीत व कोहरे की जरूरत होती है। इससे गेहूं के पौधे में ग्रोथ तो होता ही है, बालियां भी अच्छी निकलती हैं। वहीं पिछले साल भी किसानों को ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था। गेहूं के पैदावार पर इसका काफी असर पड़ा था। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि गेहूं की फसल में बालियां तो फरवरी के महीने में आती ही हैं लेकिन बुवाई के बाद से ही इसे कम तापमान की जरूरत होती है। गेहूं की बालियां के लगने तक ठंडा मौसम और कम तापमान की जरूरत है। दो दिनों से तापमान में वृद्धि देखी जा रही है। जिला कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार सिंह ने कहा कि तापमान और बढ़ता है तो गेहूं के पौधों की वृद्धि प्रभावित होगी इसका असर पैदावार और गुणवत्ता पर पड़ता है। फिलहाल सुबह-शाम की ठंड है ऐसे में किसान खेतों में नमी रखने के लिए समय-समय पर सिंचाई करते रहें, जिससे गेहूं की अच्छी पैदावार हो सके। खेतों में सिंचाई और नमी रखना किसानों के लिए आवश्यक चीज है।
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Author: Vijay Singhal
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