हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। जंक्शन रेलवे स्टेशन पर खुला ई-चार्जिंग स्टेशन खुलने के चंद दिन में ही बंद हो गया। रेलवे के नियम और महंगी बिजली होने के कारण ठेकेदार को घाटा हो रहा था। चार्जिंग स्टेशन के लिए रेलवे ने 14 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली उपलब्ध कराई थी। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने ई-चार्जिंग स्टेशन खोलने के लिए टेंडर जारी किया था। मथुरा जंक्शन की तीनों एंट्रियों पर ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन खोले गए थे। इसका ठेका 6.50 लाख रुपये सालाना पर मैसर्स हेमलता यादव के नाम पर हुआ था। उनके द्वारा तीनों एंट्रियों पर वाहन चार्जिंग स्टेशन बनाए जाने थे। सबसे पहले जंक्शन की मुख्य एंट्री के सर्कुलेटिंग एरिया में पहला ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन खोला गया, लेकिन ठेकेदार ने इस ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन को चंद दिन बाद ही बंद हो गया। इसके बंद होने की मुख्य वजह रेलवे की बिजली मंहगी होना रहा। रेलवे ने वाहन चार्जिंग के लिए ठेकेदार को 14 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली उपलब्ध कराई। इसके साथ ही रेलवे ने ई-चार्जिंग स्टेशन के लिए जो जगह उपलब्ध कराई वो भी काफी कम थी। रेलवे द्वारा उपलब्ध कराई जगह में एक बार में 6 से 7 ई-रिक्शा ही खड़े हो पाते थे। एक रिक्शा को पूरा चार्ज करने में 8 से 10 यूनिट बिजली खपती थी, जिससे उसकी चार्जिंग पर 125 से 140 रुपये की बिजली का खर्च आता था। जबकि शहरी क्षेत्र में खुले ई-रिक्शा की चार्जिंग के 100 रुपये लगते हैं। ऐसे में कौन वाहन स्वामी जंक्शन पर चाजिंग के 150 रुपये देता। इस कारण ठेकेदार को घाटा होता दिखाई दिया। ठेकेदार ने ई-चार्जिंग स्टेशन को बंद कर दिया। चार्जिंग स्टेशन के प्रबंधक सोम कुमार ने बताया कि रेलवे द्वारा 14 रुपये प्रति यूनिट की बिजली उपलब्ध कराई थी। एक वाहन को चार्ज करने पर 125 से 140 रुपये की बिजली लग रही थी। वहीं शहरी क्षेत्र में बिजली की दर 6:50 रुपये प्रति यूनिट है। मंहगी बिजली होने के कारण फर्म को घाटा हो रहा था। इस करण ई-चार्जिंग स्टेशन को बंद कर दिया है।
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Author: Vijay Singhal
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