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वृंदावन के प्राचीन गोविंद कुंड में जा रहा नालियों का दूषित पानी

ByVijay Singhal

Nov 17, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। ब्रज के प्राचीन कुंडों की लंबे समय से अनदेखी के कारण वह बदहाल हैं। वृंदावन के प्राचीन गोविंद कुंड की दो तरफ की दीवार ढह गई हैं। सीढ़ियां भी उखड़ रही हैं। कुंड में कचरे के ढेर लगे हैं और क्षेत्र के आश्रम और घरों का दूषित पानी सीधे कुंड में जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं की आस्था आहत हो रही है। ब्रज के पौराणिक कुंडों में एक गोविंद कुंड सरकारी मशीनरी की अनदेखी का शिकार हो गया है। इसमें आसपास के घरों का मलबा और मल-मूत्र बह रहा है। कुंड के भीतर सफाई के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है। वृंदावन के गौरा नगर कॉलोनी में स्थित गोविंद कुंड के बारे में मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण अपने साथियों के साथ यहां गाय चराते और लीलाएं करते थे। कान्हा और गोप-ग्वालों ने यहां कुंड का निर्माण किया, इसलिए इसका नाम गोविंद कुंड पड़ गया।
कहा यह भी जाता है कि इस स्थल पर गोविंद देवजी का प्राकट्य हुआ था। इस कुंड का पौराणिक महत्व होने के बावजूद उपेक्षित है। करीब आठ साल पहले द ब्रज फाउंडेशन और ब्रज रक्षक दल ने गोविंद कुंड का जीर्णोद्धार कराया था, लेकिन इसके बाद से सरकारी मशीनरी ने इसकी सुध नहीं ली। कुंड के हर तरफ मकान हैं हीं, अनेक मंदिर, बगीची और आश्रम भी हैं। कुंड में घरों की नालियों और सीवर का पानी हर समय बहता रहता है। कुंड की सीढि़यों की भी सफाई कराए जाने की व्यवस्था नहीं है। इस कारण सीढि़यों पर भी गंदगी की भरमार है। देखरेख के अभाव में कुंड की दो दीवारें भी गिर गई हैं। स्थानीय निवासी सावित्री देवी, मनोहर लाल एवं सुभल गोस्वामी ने दुख जताते हुए कहा कि भाजपा सरकार में भी कुंड और पौराणिक स्थलों की दुर्दशा हो रही है। करोड़ों रुपये संरक्षण के नाम पर बर्बाद हो रहे हैं, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सौंदर्यीकरण का कार्य हो जाए, कुंड के आसपास नाले नालियों का दूषित पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं की जा रही है। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्याम बहादुर सिंह ने बताया कि कुंड के जीर्णोद्धार का कार्य शुरु हो गया है। लगभग 1.70 करोड़ रुपए से यहां सुधार कार्य किए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए बैंच एवं लाइट लगाई जाएंगी।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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