हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। हाईस्कूल का फर्जी अंंकपत्र लगाकर भारतीय डाक विभाग में ग्रामीण डाक सेवक की नौकरी हासिल करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसका अंकपत्र सत्यापन में फर्जी निकला था। पुलिस अब जाली अंकपत्र बनाने वाले गिरोह की तलाश में जुटी है। यह गिरोह पांच से छह लाख रुपये लेकर अलग-अलग राज्यों से बोर्ड के फर्जी अंकपत्र बनाने का कार्य करता है। गिरोह का सरगना आगरा का बताया जा रहा है। गत दिनों डाक विभाग में ग्रामीण डाक सेवक की भर्ती निकली थी। इसमें आगरा के थाना कागारोल के गढ़ी-जुर्राहा निवासी सुनील सिंह चाहर पुत्र साहब सिंह ने भी आवेदन किया। उसने आवेदन के साथ हाईस्कूल के अंकपत्र की प्रतिलिपि लगाई। उसके नंबर देख अधिकारी चौंक गए। तमिलनाडु शिक्षा बोर्ड से 10 वीं उत्तीर्ण सुनील के अंक 600 में से 590 थे। सभी विषयों में अच्छे नंबरों से पास सुनील का अंकपत्र जब विभाग ने सत्यापन के लिए तमिलनाडु बाेर्ड के पास भेजा तो वह फर्जी निकला। इस पर डाक विभाग के निरीक्षक संजय शर्मा ने थाना सदर बाजार में आरोपी सुनील सिंह चाहर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की जांच थाना सदर बाजार के निरीक्षक अपराध धर्मेंद्र शर्मा को सौंपी गई। उन्होंने बुधवार शाम आरोपी को आगरा के कागारौल स्थित आवास से पकड़ लिया। अंकपत्र बनाने वाला गिरोह सक्रिय
सरकारी संस्थानों में नौकरी दिलाने के लिए फर्जी अंकपत्र बनाने वाले गिरोह सक्रिय है। पुलिस की जांच में सामने आया कि सुनील सिंह ने आगरा में ऐसे ही एक गिरोह से संपर्क किया। सरगना ने उसे तमिलनाडू शिक्षा बोर्ड से छह लाख रुपये में हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण कराने का भरोसा दिलाया। फर्जी तरीके से परीक्षा दिलाकर सुनील को पास दर्शाया और फर्जी अंकपत्र तैयार कर उसे थमा दिया। इसी प्रमाण पत्र को उसने नौकरी के लिए आवेदन पत्र के साथ लगा दिया, जो सत्यापन में फर्जी पाया गया। हालांकि सुनील ने अभी डेढ़ लाख रुपये ही दिए हैं।
सरकारी संस्थानों में नौकरी दिलाने के लिए फर्जी अंकपत्र बनाने वाले गिरोह सक्रिय है। पुलिस की जांच में सामने आया कि सुनील सिंह ने आगरा में ऐसे ही एक गिरोह से संपर्क किया। सरगना ने उसे तमिलनाडू शिक्षा बोर्ड से छह लाख रुपये में हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण कराने का भरोसा दिलाया। फर्जी तरीके से परीक्षा दिलाकर सुनील को पास दर्शाया और फर्जी अंकपत्र तैयार कर उसे थमा दिया। इसी प्रमाण पत्र को उसने नौकरी के लिए आवेदन पत्र के साथ लगा दिया, जो सत्यापन में फर्जी पाया गया। हालांकि सुनील ने अभी डेढ़ लाख रुपये ही दिए हैं।
जालसाजों के जाल में फंस गया सुनील
सुनील के पिता और भाई चालक हैं और निजी वाहन चलाते हैं। गांव में छोटा सा घर है। परिजन ने सोचा सुनील सरकारी नौकरी पा गया तो परिवार की गुजर-बसर अच्छे से हो जाएगी। इसी उद्देश्य से जालसालों से छह लाख रुपये में सौदा किया और डेढ़ लाख रुपये रिश्तेदारों से उधार लेकर उन्हें दे दिए। नौकरी ज्वाइन कर सेलरी मिलने पर शेष रकम देना तय हुआ था, इससे पूर्व ही सुनील को पुलिस ने धर दबोचा।
सुनील के पिता और भाई चालक हैं और निजी वाहन चलाते हैं। गांव में छोटा सा घर है। परिजन ने सोचा सुनील सरकारी नौकरी पा गया तो परिवार की गुजर-बसर अच्छे से हो जाएगी। इसी उद्देश्य से जालसालों से छह लाख रुपये में सौदा किया और डेढ़ लाख रुपये रिश्तेदारों से उधार लेकर उन्हें दे दिए। नौकरी ज्वाइन कर सेलरी मिलने पर शेष रकम देना तय हुआ था, इससे पूर्व ही सुनील को पुलिस ने धर दबोचा।
7455095736
Author: Vijay Singhal
50% LikesVS
50% Dislikes
