हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। ट्रेन के महिला डिब्बों में इन दिनों युवक सफर करते नजर आ रहे हैं। इससे महिला यात्री परेशान हैं। चाहकर भी वह ऐसा करने वाले युवकों से कुछ कह और कर नहीं पा रही हैं। ये हालात तब हैं, जब रेलवे की चेकिंग टीम रोजाना अभियान चलाकर यात्रियों से जुर्माना वसूल रही है।
रेलवे ने महिला यात्रियों को सुविधा देने के लिए लंबे रूट की कई ट्रेनों में महिला कोच की सुविधा दी है। इस डिब्बे के बाहर साफ-साफ शब्दों में लेडीज ओनली लिखवाया गया है। इसके बाद भी ये बड़ी हैरत वाली ही बात है कि ट्रेन में सीट के लिए युवक महिला बन गए हैं। महिला डिब्बों में महिलाओं से ज्यादा पुरुष नजर आते हैं। महिला कोच युवकों की भीड़ से खचाखच भरा रहता है। हालात से महिला यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। युवक उनके साथ सीट पर जाकर बैठ जाते हैं। महिला यात्री उन्हें मना करती हैं तो युवक लड़ने को तैयार हो जाते हैं। कई बार कहने के बाद भी महिला कोच से नीचे नहीं उतरते। बेशर्मी दिखाते हुए महिला कोच में बैठे रहते हैं। शनिवार को जंक्शन पर ऐसा ही नजारा देखने को मिला। ट्रेन संख्या 20807 हीराकुंड एक्सप्रेस दोपहर करीब 1 बजकर 48 मिनट पर जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या दो पर पहुंची। ट्रेन के महिला डिब्बे में सीट से लेकर गेट तक युवक ही बैठे नजर आए। जबकि डिब्बे में महिलाओं की संख्या न के बराबर नजर आई। महिला डिब्बा युवकों की भीड़ से भरा होने के कारण महिला यात्रियों को मजबूरी में जनरल डिब्बों में सफर करना पड़ा। अपमान जनक स्थितियों से दो चार होना पड़ा। दिव्यांग कोच में रहती है साधारण युवकों की भीड़ महिला डिब्बे में ही नहीं ऐसा ही हाल दिव्यांग डिब्बों में भी नजर आता है। दिव्यांग यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेन में लगाए गए दिव्यांग कोच में साधारण युवकों की भीड़ नजर आती है। दिव्यांग यात्री जनरल डिब्बों में धक्के खाते हैं। उनके कोच में सही सलामत हाथ पैर वाले यात्रियों का कब्जा रहता है। प्रशस्ति श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे ने कहा, महिला और दिव्यांग कोच में अनधिकृत तरीके से अन्य यात्री सफर न करें। इसे लेकर विशेष अभियान चलाया जाएगा। जो भी यात्री अनधिकृत तरीके से यात्रा करता मिलेगा उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे ने महिला यात्रियों को सुविधा देने के लिए लंबे रूट की कई ट्रेनों में महिला कोच की सुविधा दी है। इस डिब्बे के बाहर साफ-साफ शब्दों में लेडीज ओनली लिखवाया गया है। इसके बाद भी ये बड़ी हैरत वाली ही बात है कि ट्रेन में सीट के लिए युवक महिला बन गए हैं। महिला डिब्बों में महिलाओं से ज्यादा पुरुष नजर आते हैं। महिला कोच युवकों की भीड़ से खचाखच भरा रहता है। हालात से महिला यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। युवक उनके साथ सीट पर जाकर बैठ जाते हैं। महिला यात्री उन्हें मना करती हैं तो युवक लड़ने को तैयार हो जाते हैं। कई बार कहने के बाद भी महिला कोच से नीचे नहीं उतरते। बेशर्मी दिखाते हुए महिला कोच में बैठे रहते हैं। शनिवार को जंक्शन पर ऐसा ही नजारा देखने को मिला। ट्रेन संख्या 20807 हीराकुंड एक्सप्रेस दोपहर करीब 1 बजकर 48 मिनट पर जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या दो पर पहुंची। ट्रेन के महिला डिब्बे में सीट से लेकर गेट तक युवक ही बैठे नजर आए। जबकि डिब्बे में महिलाओं की संख्या न के बराबर नजर आई। महिला डिब्बा युवकों की भीड़ से भरा होने के कारण महिला यात्रियों को मजबूरी में जनरल डिब्बों में सफर करना पड़ा। अपमान जनक स्थितियों से दो चार होना पड़ा। दिव्यांग कोच में रहती है साधारण युवकों की भीड़ महिला डिब्बे में ही नहीं ऐसा ही हाल दिव्यांग डिब्बों में भी नजर आता है। दिव्यांग यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेन में लगाए गए दिव्यांग कोच में साधारण युवकों की भीड़ नजर आती है। दिव्यांग यात्री जनरल डिब्बों में धक्के खाते हैं। उनके कोच में सही सलामत हाथ पैर वाले यात्रियों का कब्जा रहता है। प्रशस्ति श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे ने कहा, महिला और दिव्यांग कोच में अनधिकृत तरीके से अन्य यात्री सफर न करें। इसे लेकर विशेष अभियान चलाया जाएगा। जो भी यात्री अनधिकृत तरीके से यात्रा करता मिलेगा उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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Author: Vijay Singhal
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