हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में जगद्गुरु कृपालु महाराज की बड़ी पुत्री डॉक्टर विशाखा त्रिपाठी का रविवार तड़के यमुना एक्सप्रेस-वे पर नोएडा के पास सड़क हादसे में निधन हो गया, जबकि कृपालु महाराज की दो अन्य पुत्रियां दिल्ली के अपोलो अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहीं हैं। विशाखा के निधन से आध्यात्मिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका अंतिम संस्कार 28 नवंबर को यमुना के मोक्षधाम पर किया जाएगा। पार्थिव शरीर सोमवार सुबह आएगा। जगद्गुरु कृपालु परिषद की अध्यक्ष डाॅक्टर विशाखा त्रिपाठी अपनी दोनों बहनों के साथ दिल्ली एयरपोर्ट अपनी निजी कार से जा रही थीं, तभी नोएडा के दनकौर के समीप पीछे से आ रहा कैंटर ओवरटेक करने के प्रयास में उनकी गाड़ी पर पलट गया, जिससे विशाखा त्रिपाठी (78) की मौके पर ही मौत हो गई। उनकी बहनें श्यामा त्रिपाठी और कृष्णा त्रिपाठी को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है।
प्रसिद्ध प्रेम मंदिर और कीर्ति मंदिर के संस्थापक जगद्गुरु कृपालु महाराज के साल 2013 में देहावसान के बाद वसीयत के अनुसार उनकी बड़ी पुत्री डाॅक्टर विशाखा त्रिपाठी को जगद्गुरु कृपालु परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। जिनके निर्देशन में वृंदावन और मनगढ़ में संचालित धर्मार्थ कार्यों की देखरेख चल रही थी। डॉक्टर विशाखा महाराजश्री के साथ लंबे समय से विभिन्न सेवा प्रकल्पों से जुड़ी हुई थीं। खास तौर पर बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके द्वारा अनेक योजनाएं चलाई जा रही थीं। जिसके लिए उन्हें कई बार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका था। विशेष रूप से साल 2014 में नेल्सन मंडेला शांति पुरस्कार, मदर टेरेसा उत्कृष्टता पुरस्कार, राजीव गांधी वैश्विक उत्कृष्टता पुरस्कार के साथ ही शीर्ष 50 भारतीय आइकन पुरस्कार से नवाजा गया था। इतना ही नहीं साहित्य पर अच्छी पकड़ रखने वाली विशाखा त्रिपाठी को कोलंबो के द ओपन यूनिवर्सिटी फॉर कॉम्प्लीमेंट्री मेडिसिंस के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था। कोतवाल रवि त्यागी ने बताया कि सोमवार सुबह 11 बजे पार्थिव शरीर वृंदावन लाया जाएगा। 28 नवंबर को मोक्षधाम वृंदावन में अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रेम मंदिर के प्रबंधक अजय त्रिपाठी ने बताया कि सड़क हादसे में मौत होने से ट्रस्ट की अध्यक्ष विशाखा त्रिपाठी का पार्थिव शरीर सोमवार सुबह 11 बजे तक आने की उम्मीद है। तीन दिन तक पार्थिव शरीर प्रेम मंदिर वृंदावन में रखा जाएगा। उसके बाद 28 नवंबर को वृंदावन के मोक्षधाम पर अंतिम संस्कार होगा। इन तीन दिनों में पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन भक्त कर सकेंगे। वहीं मंदिर की सेवा चलती रहेगी। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद रविवार शाम प्रेम मंदिर के पट बंद कर दिए गए। जबकि अंदर सेवा चलती रही। मंदिर बंद होने से लोग वापस लौट गए।
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Author: Vijay Singhal
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