हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। मुड़िया पूर्णिमा मेले में आए श्रद्धालुओं को गिरिराजजी के दर्शन के बाद घरों को लौटने में पसीने छूट गए। श्रद्धालुओं के आगे रोडवेज और रेलवे की व्यवस्थाएं कम पड़ गईं। मथुरा से झांसी जा रही स्पेशल ट्रेन को भरने में तीन से चार मिनट का वक्त लगा। उसके बाद भी सिर्फ स्टेशन के प्लेटफार्म एक पर ही हजारों यात्री मौजूद थे। कुछ ऐसे ही हालात गोर्वधन चौराहे व अन्य स्थानों पर मिले। ये लोग बसों व अन्य वाहनों का इंतजार करते रहे। जाम व अन्य कारणों से गोवर्धन से मथुरा आने में 25 किमी की दूरी में ढाई घंटे से अधिक का वक्त लगा।
मेले के लिए विशेष ट्रेनें और बोगियां बढ़ाए जाने के बाद भी यात्रियों को राहत नहीं मिल सकी। हालात यह रही कि स्लीपर कोच भी सामान्य श्रेणी के कोच जैसे नजर आए। दोपहर करीब 1 बजकर 14 मिनट पर सवाईमाधोपुर की ओर जाने वाली ट्रेन प्लेटफॉर्म संख्या चार पर पहुंची, इसमें चढ़ने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। इस दौरान कई तो प्लेटफार्म से उतरकर दूसरी ओर से चढ़ते दिखे। कइयों ने सीट लेने की कोशिश में आपातकालीन खिड़की का सहारा लिया। प्लेटफाॅर्म नंबर एक पर एक बजकर 22 मिनट पर जैसे ही मथुरा-झांसी विशेष गाड़ी पहुंची, तीन से चार मिनट में ही भर गई। प्लेटफार्म नंबर दो पर खड़े बड़ी संख्या में यात्री ट्रैक पार कर ट्रेेन में चढ़ते दिखे। हालांकि कंट्रोल रूम से उद्घोषणा के बाद जीआरपी और आरपीएफ की टीम हरकत में आई। कुछ देर बाद ट्रेन तो चली गई, पर भीड़ में कोई कमी नहीं आई। इस दौरान सभी प्रतीक्षालय, बाहर बने शिविर और अन्य छाया स्थलों पर यात्रा से थके श्रद्धालु विश्राम करते दिखे। वहीं परिवहन निगम अपनी नियमित बसों के सहारे ही मथुरा से आगे की यात्रा करा रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग मजबूरन डग्गामार वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हुए। गोवर्धन से रोडवेज बस से मथुरा जंक्शन पहुंचीं गंगापुर सिटी की रामकली, अनीता और महेश ने बताया कि वे लोग सुबह सात बजे बस में बैठे थे और यहां करीब 10 बजे पहुंचे। रास्ते में जाम और अन्य दिक्कतों के कारण समय लगा। प्लेटफॉर्म एक पर उत्तर मध्य रेलवे स्काउट गाइड का शिविर लगा है। यहां 27 जून से 120 स्काउट-गाइड दिन-रात लोगों की सेवा, रेलवे का सहयोग करने में जुटे हैं। ये सभी बिछड़े लोगों को अपनों से भी मिला रहे हैं। अब तक 36 बिछड़ों को अपनों से मिला चुके हैं। इनमें मुरैना के 13 साल के अंकित, आगरा निवासी 12 साल की साक्षी भी हैं।
मेले के लिए विशेष ट्रेनें और बोगियां बढ़ाए जाने के बाद भी यात्रियों को राहत नहीं मिल सकी। हालात यह रही कि स्लीपर कोच भी सामान्य श्रेणी के कोच जैसे नजर आए। दोपहर करीब 1 बजकर 14 मिनट पर सवाईमाधोपुर की ओर जाने वाली ट्रेन प्लेटफॉर्म संख्या चार पर पहुंची, इसमें चढ़ने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। इस दौरान कई तो प्लेटफार्म से उतरकर दूसरी ओर से चढ़ते दिखे। कइयों ने सीट लेने की कोशिश में आपातकालीन खिड़की का सहारा लिया। प्लेटफाॅर्म नंबर एक पर एक बजकर 22 मिनट पर जैसे ही मथुरा-झांसी विशेष गाड़ी पहुंची, तीन से चार मिनट में ही भर गई। प्लेटफार्म नंबर दो पर खड़े बड़ी संख्या में यात्री ट्रैक पार कर ट्रेेन में चढ़ते दिखे। हालांकि कंट्रोल रूम से उद्घोषणा के बाद जीआरपी और आरपीएफ की टीम हरकत में आई। कुछ देर बाद ट्रेन तो चली गई, पर भीड़ में कोई कमी नहीं आई। इस दौरान सभी प्रतीक्षालय, बाहर बने शिविर और अन्य छाया स्थलों पर यात्रा से थके श्रद्धालु विश्राम करते दिखे। वहीं परिवहन निगम अपनी नियमित बसों के सहारे ही मथुरा से आगे की यात्रा करा रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग मजबूरन डग्गामार वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हुए। गोवर्धन से रोडवेज बस से मथुरा जंक्शन पहुंचीं गंगापुर सिटी की रामकली, अनीता और महेश ने बताया कि वे लोग सुबह सात बजे बस में बैठे थे और यहां करीब 10 बजे पहुंचे। रास्ते में जाम और अन्य दिक्कतों के कारण समय लगा। प्लेटफॉर्म एक पर उत्तर मध्य रेलवे स्काउट गाइड का शिविर लगा है। यहां 27 जून से 120 स्काउट-गाइड दिन-रात लोगों की सेवा, रेलवे का सहयोग करने में जुटे हैं। ये सभी बिछड़े लोगों को अपनों से भी मिला रहे हैं। अब तक 36 बिछड़ों को अपनों से मिला चुके हैं। इनमें मुरैना के 13 साल के अंकित, आगरा निवासी 12 साल की साक्षी भी हैं।
मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक पर बने प्राथमिक उपचार केंद्र पर 26 जून से चिकित्सकों व स्वाथ्यकर्मियों की टीम की सेवा में जुटी है। तीन जुलाई दोपहर तक टीम 115 से अधिक लोगों को उपचार दे चुकी थी। केंद्र के प्रभारी डॉ. धीरज ने बताया कि शिविर में गर्मी के अलावा यात्रा की थकान, खान-पान की दिक्कतों संबंधी समस्या से जुड़े मरीज आए। इन सभी को उपचार दिया गया है।
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Author: Vijay Singhal
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