मृतक के मामा यशपाल ने बताया कि सुबह सात बजे चिकित्सक चिराग को ऑपरेशन थियेटर में ले गए। करीब ढाई घंटे बाद बाहर निकले और बिना बताए एंबुलेंस में डालकर मंडी समिति स्थित न्यूरो अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ऑपरेशन करने वाला चिकित्सक शव को वापस अस्पताल लाया परिजनों को उसके मृत होने की जानकारी देकर गायब हो गया। मृतक के मामा का आरोप है कि चिकित्सकों ने ऑपरेशन से पहले बच्चे को बेहोश करने के लिए एनेस्थिसियोलॉजिस्ट (बेहोश करने वाला डॉक्टर) को नहीं बुलाया और स्वयं ही इंजेक्शन लगा दिया। इसी इंजेक्शन के कारण बच्चे की मौत हुई। परिजनों को बच्चे के मरने का पता चला तो उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। साथ ही फोन करके पुलिस को बुलाया। गोविंद थाना प्रभारी निरीक्षण ललित कुमार भाटी पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और समझा बुझाकर परिजनों को शांत कराया। बमूरी निवासी मुकेश का गोवर्धन के आन्यौर निवासी रामखिलाड़ी की पुत्री मंजू के साथ विवाह हुआ था। विवाह के 14 साल बाद तक संतान नहीं हुई तो मुकेश ने अपनी बहन के बेटे चिराग को गोद लिया। चिराग के घर में आने से पूरा परिवार खुश था, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह खुशी चार साल के लिए ही हैं। चिराग की मौत होने से मुकेश और मंजू समेत अन्य परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। दीपक गोयल, संचालक, मां सरस्वती हॉस्पिटल ने बताया बेहोशी का इंजेक्शन देने के दौरान बच्चे की सांस रुक गई थी। उसे सीपीआर भी दिया, लेकिन सांस नहीं लौटी। इस पर उसे परिजनों के साथ एंबुलेंस से न्यूरो अस्पताल ले गए। परिजनों के साथ आए लोगों ने आरोप लगाया तो पुलिस को बुलाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। ललित कुमार भाटी, बिरला मन्दिर चौकी इंचार्ज,व गोविंद नगर थाना प्रभारी निरीक्षक ने कहा बच्चे की मौत की सूचना पर हंगामे की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचे और परिजनों को शांत कराया। परिजनों के कहने पर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजन तहरीर देंगे तो मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। यशपाल सिंह, मृतक का मामा का कहना है अस्पताल में डॉक्टर ने बेहोशी का स्वयं ही इंजेक्शन लगाया, जबकि इंजेक्शन लगाने वाला चिकित्सक अलग होता है। चिकित्सक की लापरवाही के कारण बच्चे की मौत हुई है। ऐसा नहीं था तो चिकित्सक अस्पताल छोड़कर क्यों भागा।
