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वृद्ध मां की बीमारी से हुई मौत, लाश देख बेटी लटक गई फंदे पर; एक साथ जली दोनों की चिताएं

ByVijay Singhal

Jan 8, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के वृंदावन थाना क्षेत्र के किशोरपुरा मोहल्ले में एक बेटी ने मां की मौत के बाद फांसी का फंदा लगाकर जान दे दी। देर शाम मोहल्ले के लोगों द्वारा पुलिस को सूचना दी गई। शव का पोस्टमार्टम कराकर मृतका के जीजा के सुपुर्द किया। मां और बेटी की चिता एक साथ जलाई गई। किशोरपुरा मोहल्ले में स्थित धोबी वाली गली में 1947 में पाकिस्तान से आकर राज अरोड़ा अपने भाई अशोक के साथ बस गए थे। यहां राज अरोड़ा की पत्नी राजरानी को तीन बच्चे, जिनमें दो बेटी व एक बेटा हुआ। 2011 में राज अरोड़ा की मौत हो गई। इसके बाद उनके बेटे मुन्नू की मौत हो गई। वहीं, बड़ी बेटी की शादी दिल्ली में हो गई, वह ससुराल में रहने लगी। घर में विधवा राजरानी (85) व उनकी अविवाहित बेटी नीलम अरोड़ा (45) रहती थी। बेटी अपना व मां के गुजारे के लिए कपड़ों की सिलाई और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी। नीलम अरोड़ा के जीजा विजय कुमार ने बताया कि शनिवार दोपहर 12 बजे करीब नीलम ने उन्हें फोन कर बताया कि मां की तबीयत अधिक खराब हो गई है। इसके बाद उसने फोन बंद कर लिया। इधर, इसी दौरान मां की मौत हो गई। इसके बाद नीलम ने फांसी का फंदा लगा लिया। घर में कोई हलचल न होने पर मोहल्ले के लोगों ने संदिग्धता जाहिर करते हुए आवाज लगाई। अंदर से कोई प्रतिक्रिया न आने पर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंचकर घर में घुसी तो एक और मां का शव पड़ा था और दूसरी ओर बेटी का शव फंदे पर लटका था। विजय कुमार के अनुसार पुलिस द्वारा दी गई सूचना पर वह वृंदावन आए। नीलम के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद दोनों शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इंस्पेक्टर आनंद शाही ने बताया गया कि राजरानी अरोड़ा की शनिवार को मृत्यु हो गई। इसके बाद नीलम अकेली रह गई। शायद इसी वजह से उसने आत्महत्या कर ली है।
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Author: Vijay Singhal

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मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण को लेकर 6 दिसंबर को मथुरा में प्रस्तावित कार सेवा को लेकर हरिद्वार में अखाड़ा परिषद ने स्थिति स्पष्ट की है। हरिद्वार में अखाड़ा परिषद से जुड़े संतों ने कहा कि 6 दिसंबर को परिषद की ओर से मथुरा में किसी भी प्रकार की कार सेवा नहीं होगी। अखाड़ा परिषद किसी कार सेवा का समर्थन नहीं करती है और अखाड़ा परिषद का कार से सेवा से कोई मतलब नहीं है। यह बात उन्होंने हरिद्वार में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ लाई गई रजत शिला का विधि-विधान से पूजन के दौरान कही। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डाॅ. रवींद्र पुरी महाराज एवं निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज ने अपने स्थान पर संकल्पित रजत शिला का पूजन किया। उधर, संतों से कहा कि न्यायालय के आदेश के बिना वह किसी प्रकार का समर्थन नहीं करेंगे।डाॅ. रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जा सकता है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले का समाधान न्यायालय के माध्यम से ही संभव है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण में हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा विश्वास है। जिस प्रकार अयोध्या मामले में न्यायालय के माध्यम से फैसला आया, उसी प्रकार मथुरा प्रकरण में भी न्यायालय से निर्णय आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर को अखाड़ा परिषद की ओर से किसी भी प्रकार की कार सेवा का कार्यक्रम नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि प्रकरण से संबंधित प्राचीन साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं और इन्हीं के आधार पर न्यायालय निर्णय करेगा। 7455095736
मथुरा में 6 दिसंबर को कार सेवा नहीं होगी:अखाड़ा परिषद ने किया कार्यक्रम रद्द,

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