हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। दिल्ली के प्रगति मैदान में 3 दिन का इंटरनेशनल म्यूजियम एक्सपो आयोजित किया जा रहा है। 18 से 20 मई तक आयोजित होने वाले इस एक्सपो में संग्रहालय में रखी भगवान बुद्ध की प्रतिमा को भी शामिल किया गया है। मथुरा शैली में बनी प्रतिमा को दिल्ली भेज दिया गया है। मथुरा संग्रहालय से भेजी गई यह एकमात्र प्रतिमा कटरा केशवदेव से खुदाई में मिली थी। 18 मई को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर दिल्ली के प्रगति मैदान में 3 दिवसीय इंटरनेशनल म्यूजियम एक्सपो का आयोजन किया जा रहा है। इस एक्सपो का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। आजादी के अमृत महोत्सव के दूसरे चरण के तहत यह आयोजन किया जा रहा है। मथुरा को वैसे तो पूरी दुनिया में भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है। लेकिन इस नगरी की एक और पहचान है वह है यहां की मूर्तिकला। आदिकाल से मूर्तिकला के क्षेत्र में मथुरा अपना अहम स्थान रखता है। मथुरा में विभिन्न धर्मों से संबंधित हजारों मूर्तियां बनी और इन्होंने विश्व में प्रसिद्धि पाई। मथुरा में अधिकांश भगवान बुद्ध और जैन धर्म से संबंधित मूर्तियां मिली। बौद्ध संस्कृति के कई प्रमाण मिले हैं। कान्हा की नगरी में बौद्ध संस्कृति का विस्तार हुआ। यहां भगवान बुद्ध की प्रतिमाओं को लाल बलुआ पत्थर पर बनाया गया।।मथुरा में बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने शिक्षा भी ग्रहण की थी। जानकार बताते हैं कि सबसे पहले प्रतिमा निर्माण के लिए दो ही कला प्रचलन में थी। एक मथुरा मूर्ति कला दूसरी गंगाधर मूर्ति कला। भगवान बुद्ध की बनी पहली मूर्ति भी यहीं बनी। भगवान बुद्ध की पहली प्रतिमा मथुरा में ही मिली। सन 1860 में श्री कृष्ण जन्मस्थान के समीप स्थित कटरा केशवदेव की खुदाई के दौरान चित्तीदार,लाल बलुआ पत्थर पर भगवान बुद्ध की विश्व की पहली प्रतिमा बनाई गई। कुषाण कालीन इस मूर्ति में भगवान बुद्ध अभय मुद्रा में बैठे हैं। उनके पीछे पीपल वृक्ष बना हुआ है। प्रतिमा पर भगवान बुद्ध के दोनों तरफ उनके अनुचक खड़े हुए हैं, सर के ऊपर दोनों ओर दो गंदर्भ पुष्प वर्षा करते हुए दिखाई देते हैं। डेढ़ फीट चौड़ी और ढाई फीट ऊंची यह प्रतिमा करीब 2200 वर्ष पुरानी है। मथुरा के राजकीय संग्रहालय में कुषाण और गुप्तकालीन मथुरा शैली की अनेकों प्रतिमा हैं। इसके अलावा सिक्के,लघुचित्र,धातु से बनी मूर्ति,लकड़ी से बने प्राचीन धरोहर भी हैं। संग्रहालय में मौजूद प्रतिमाओं में शुंघकालीन मातृ देवी,कामदेव फलक, गुप्तकालीन नारी व विदूषक, कुषाण कालीन धातु मूर्तियां,कार्तिकेय,देव युगल,नाग मूर्ति भी हैं। संग्रहालय के उप निदेशक यशवंत सिंह राठौर ने बताया कि दिल्ली में आयोजित एक्सपो में मथुरा संग्रहालय की मूर्ति को प्रदर्शित किया जायेगा यह गौरव का क्षण है। यह प्रतिमा 3 दिन एक्सपो में प्रदर्शित होने के बाद 21 मई को वापस मथुरा संग्रहालय में आ जायेगी।
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Author: Vijay Singhal
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