हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। छटीकरा में डालमिया फार्म हाउस में पेड़ कटान को लेकर विजय सिंघल पत्रकार ने कहा वैसे तो वृक्ष सदैव ही वंदनीय और कल्याणमय हैं किंतु वृन्दावन के वृक्ष भगवद स्वरूप हैं। इसका प्रमाण हमारे टटिया स्थान में देखने को मिलता है, जहां वृक्षों की पत्तियों को भी हानि पहुंचाना अपराध माना जाता है। यहां के वृक्षों के रूप में स्वयं भगवान के भक्त निवास करते हैं। इसलिए इन्हें हानि पहुंचाना राष्ट्रीय और पर्यावरणीय ही नहीं अपितु भगवदीय अपराध भी है। वृक्ष जीवन के आधार और प्राणवायु के शोधक हैं। विगत वर्षों में वृंदावन में थोथे विकास का पहिया जिस गति से घूम रहा है, उतनी ही तीव्रता से यहां के वास्तविक स्वरूप वृक्षों और बगीचों का पतन हो रहा है। इस ओर न कोई दिशा है, न जिम्मेदारी और न जबावदेही। वास्तव में इतनी बड़ी तादाद में वृक्षों को काटने वालों पर कठोर दण्डात्मक कार्यवाही होनी चाहिए। यदि सबकुछ इसी तरह चलता रहा तो वृन्दावन का वास्तविक स्वरूप और मर्यादा नष्ट हो जाएगी। गोपियों, ब्रजजनों, साधु-संतों के रूप में ब्रज में निवास करने वाले इन वृक्षों की हत्या जघन्य अपराध है। एक वृक्ष की हत्या एक पुत्र के बराबर मानी गई है। ऐसे में जिन आतातायी लोगों ने वृक्ष रूपी इन पुत्रों की हत्या की है, उनके वंश का भी समूल नाश इसी प्रकार हो जायेगा। इस कृत्य के विरोध में सभी संगठनों, धर्माचार्यों और साधु-संतों को एकजुट तथा संकल्पित होना चाहिए। वृंदावन धाम की चैतन्यता वृक्षों से है। वृक्षों से ही यहां की भूमि का सौंदर्य है। ब्रज के भक्तों ने इन वृक्षों के सानिध्य में ही भगवान की प्राप्ति की है। इनका अमानवीयता से कटान करने वाले पापियों को भगवान कभी क्षमा नहीं करेंगे। इसका दंड तो इन्हें भुगतना ही पड़ेगा बल्कि यहां निवास करनेवालों को भी कभी शांति नहीं मिलेगी। वृक्षों के साथ ही मोर, सर्प आदि वन्यजीवों की हत्या होना अत्यंत चिंतनीय है।
मथुरा। छटीकरा में डालमिया फार्म हाउस में पेड़ कटान को लेकर विजय सिंघल पत्रकार ने कहा वैसे तो वृक्ष सदैव ही वंदनीय और कल्याणमय हैं किंतु वृन्दावन के वृक्ष भगवद स्वरूप हैं। इसका प्रमाण हमारे टटिया स्थान में देखने को मिलता है, जहां वृक्षों की पत्तियों को भी हानि पहुंचाना अपराध माना जाता है। यहां के वृक्षों के रूप में स्वयं भगवान के भक्त निवास करते हैं। इसलिए इन्हें हानि पहुंचाना राष्ट्रीय और पर्यावरणीय ही नहीं अपितु भगवदीय अपराध भी है। वृक्ष जीवन के आधार और प्राणवायु के शोधक हैं। विगत वर्षों में वृंदावन में थोथे विकास का पहिया जिस गति से घूम रहा है, उतनी ही तीव्रता से यहां के वास्तविक स्वरूप वृक्षों और बगीचों का पतन हो रहा है। इस ओर न कोई दिशा है, न जिम्मेदारी और न जबावदेही। वास्तव में इतनी बड़ी तादाद में वृक्षों को काटने वालों पर कठोर दण्डात्मक कार्यवाही होनी चाहिए। यदि सबकुछ इसी तरह चलता रहा तो वृन्दावन का वास्तविक स्वरूप और मर्यादा नष्ट हो जाएगी। गोपियों, ब्रजजनों, साधु-संतों के रूप में ब्रज में निवास करने वाले इन वृक्षों की हत्या जघन्य अपराध है। एक वृक्ष की हत्या एक पुत्र के बराबर मानी गई है। ऐसे में जिन आतातायी लोगों ने वृक्ष रूपी इन पुत्रों की हत्या की है, उनके वंश का भी समूल नाश इसी प्रकार हो जायेगा। इस कृत्य के विरोध में सभी संगठनों, धर्माचार्यों और साधु-संतों को एकजुट तथा संकल्पित होना चाहिए। वृंदावन धाम की चैतन्यता वृक्षों से है। वृक्षों से ही यहां की भूमि का सौंदर्य है। ब्रज के भक्तों ने इन वृक्षों के सानिध्य में ही भगवान की प्राप्ति की है। इनका अमानवीयता से कटान करने वाले पापियों को भगवान कभी क्षमा नहीं करेंगे। इसका दंड तो इन्हें भुगतना ही पड़ेगा बल्कि यहां निवास करनेवालों को भी कभी शांति नहीं मिलेगी। वृक्षों के साथ ही मोर, सर्प आदि वन्यजीवों की हत्या होना अत्यंत चिंतनीय है।
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Author: Vijay Singhal
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