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मथुरा में देश भर के चिकित्सक कर रहे मंथन, कहा- एलोपैथिक रोग खत्म करने की बजाय करती है ट्रांसफर

ByVijay Singhal

Jun 30, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा सदियों पुरानी वह पद्धति है। इससे घर में ही गंभीर रोगों का इलाज कर लिया जाता था। लेकिन वर्तमान में यह पद्धति विलुप्त होने के कगार पर है। इस पद्धति को जीवित रखने के लिए भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा संघ सरकार से इसको मान्यता देने की मांग कर रहा है। भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े चिकित्सक इन दिनों मथुरा के वृंदावन में मंथन कर रहे हैं। इसी के साथ ही अपना गोल्डन जुबली समारोह मना रहे हैं। भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा संघ का गोल्डन जुबली समारोह मथुरा के वृंदावन में आयोजित किया जा रहा है। श्री कृष्ण साधक ट्रस्ट में आयोजित तीन दिवसीय स्थापना दिवस समारोह में देश भर के डेढ़ सौ से ज्यादा प्राकृतिक चिकित्सक प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़ी बारीकियों पर चिंतन कर रहे हैं। गुरुकुल मार्ग स्थित श्री कृष्ण साधक ट्रस्ट में आयोजित तीन दिवसीय स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ भगवान धन्वंतरि के चित्रपट पर माल्यार्पण से शुरू हुआ। संघ के कार्यक्रम संयोजक डॉक्टर अरविंद त्यागी ने बताया कि संगठन मूल रूप से भारतीय संस्कृति की प्रतीक स्वरूप इस चिकित्सा पद्धति को जन जन तक पहुंचाने के कार्य में जुटी है। आज इस भौतिकवादी समाज में तत्काल स्वास्थ्य सुख पाने के लिए लोग एलोपैथी पद्वति का अधिक प्रयोग करते हैं लेकिन किसी भी रोग को जड़ से खत्म करने की क्षमता सिर्फ प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में है। भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा संघ के 50 वें स्थापना दिवस समारोह में देश भर के 18 राज्यों से आए 166 चिकित्सक इस पैथी को बढ़ाने के लिए मंथन कर रहे हैं। कार्यक्रम में आए संघ के अध्यक्ष सुभाष चंद जैन ने बताया कि अभी देश में केवल 4 राज्य बंगाल, आसाम,महाराष्ट्र और केरल हैं जहां प्राकृतिक चिकित्सा के लिए रजिस्ट्रेशन होता है। उनकी मांग है कि केंद्र सरकार इस पद्धति के लिए देश भर में मान्यता दे। कुछ यूनिवर्सिटी में इसे पढ़ाया जाता है लेकिन जिस तरह प्रचार, प्रसार होना चाहिए वह नहीं हो रहा। संघ के महामंत्री डॉक्टर प्रबोधराज चंदोल ने बताया कि मनुष्य जीवन के मूल में अग्नि,वायु,पृथ्वी,जल और आकाश ये पंचतत्व शामिल हैं। हमें स्वस्थ जीवन के लिए इन पंच तत्वों की आवश्यकता है।लेकिन वायु,जल और मिट्टी प्रदूषित हो चुकी है इन तत्वों को सुरक्षित करना होगा। उन्होंने बताया कि पचासवें स्थापना दिवस समारोह में देश भर के अठारह राज्यों से प्रतिनिधि सहभागिता कर रहे हैं। इस मौके पर प्राकृतिक चिकित्सा सम्मेलन के साथ ही पत्रिका का विमोचन किया गया। 1973 में बनाए गए भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा संघ अभी तक देश के अलग अलग शहरों में स्थापना दिवस समारोह मना चुके हैं। लेकिन यह पहला मौका है जब मथुरा में संघ अपना स्थापना दिवस मना रहा है। कार्यक्रम में 5 व्योवृद्ध चिकित्सकों का सम्मान किया गया। जिसमें उत्तर प्रदेश के सच्चिदानंद को डॉक्टर योगेंद्र नाथ मिश्र प्राकृतिक चिकित्सा सम्मान, महाराष्ट्र के धनलाल शैंद्रे को डॉक्टर जे एम जस्सावाला प्राकृतिक चिकित्सा सम्मान, तपन कुमार भट्टाचार्य को डॉक्टर खुशीराम दिलकश प्राकृतिक चिकित्सा सम्मान,गौरांग चरण राउत को डॉक्टर रामदत्त शर्मा प्राकृतिक चिकित्सा सम्मान और डॉक्टर शंकरानंद को राम निवास त्यागी प्राकृतिक चिकित्सा सम्मान दिया गया।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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