हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। नगर निगम क्षेत्र में नियुक्त शिक्षकों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए कोरोना का हवाला देकर डिविजन बेंच में दायर की गई बेसिक शिक्षाधिकारी की स्पेशल अपील को खारिज कर दिया है। इससे नगर निगम क्षेत्र में पदस्थ शिक्षकों ने राहत की सांस ली है। अदालत के इस आदेश पर शिक्षकों ने हर्ष व्यक्त किया है। नगर निगम मथुरा वृंदावन की विस्तारित सीमा में सम्मिलित विद्यालयों के अध्यापक व अध्यापिका जो नगर निगम क्षेत्र में रहना चाहते थे, उन्हें 27 जुलाई 2000 के शासनादेश से उनको शहरी क्षेत्र में रहने का विकल्प चुनने का अवसर दिया गया था। जो ग्रामीण क्षेत्र में जाना चाहते वो ग्रामीण क्षेत्र का विकल्प चुनकर ग्रामीण क्षेत्र में जा सकते थे। 7 जुलाई 2006 के शासनादेश में नगर निगम की विस्तारित सीमा के विद्यालयों में पदस्थापन के लिए वरिष्ठता के आधार पर पूरे जिले के शिक्षकों से विकल्प आमंत्रित करते हुए विज्ञप्ति जारी कर दी गई, जिससे विवाद उत्पन्न हो गया, क्योंकि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के आधार पर पहले नगर निगम की विस्तारित सीमा में कार्यरत अध्यापकों से नगर क्षेत्र में रहने का विकल्प लेकर नगर क्षेत्र में पदस्थापित किया जाना था। उसके बाद शेष पदों के लिए पूरे जिले के शिक्षकों से विकल्प मांगे जाने चाहिए थे। जुलाई 2006 के शासनादेश को 18586/2019 बृजबिहारी अग्रवाल व 13 अन्य याचिका में उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, जिसमें न्यायालय ने जुलाई 2006 के शासनादेश, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद और जिला बेसिक शिक्षाधिकारी की विज्ञप्ति को जनवरी 2020 में निरस्त कर दिया। इस तरह न्यायालय के आदेश से जुलाई 2000 का शासनादेश बहाल हो गया था। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षाधिकारी मथुरा और बेसिक शिक्षा परिषद ने पांच वर्ष बाद कोरोना का हवाला देते हुए बृज बिहारी अग्रवाल व 13 अन्य की याचिका में पारित आदेश के विरुद्ध जुलाई 2006 के शासनादेश को बहाल कराने के लिए डिविजन बेंच में स्पेशल अपील दाखिल की। डिवीजन बेंच ने जिला बेसिक शिक्षाधिकारी और बेसिक शिक्षा परिषद की स्पेशल अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आप 1725 दिन की देरी से हो। नगर निगम संघर्ष मंच, मथुरा वृंदावन के संयोजक कुलदीप सारस्वत ने बताया कि अपील खारिज होने के बाद वर्तमान में जुलाई 2000 का शासनादेश अस्तित्व में है, जिसके तहत नगर निगम की विस्तारित सीमा के अध्यापकों से नगर क्षेत्र में रहने का विकल्प लेकर उन्हें पूर्ण रूप से नगर निगम में पदस्थापित करने की कार्रवाई हो सकेगी। न्यायालय के आदेश पर अनुपम शर्मा, बृजबिहारी अग्रवाल, गोविंद चौहान, मुकुलकांत, अंजना शर्मा, गुरुप्यारी सत्संगी, सारिका सिंह, नंदा कुमारी, नीतू सिंह, मुक्ता कुंतल, बृजराज सारस्वत, कौशल गौतम, सुनील यादव, रविंद्र मीणा, विजय वशिष्ठ,अंजली पवार आदि ने हर्ष व्यक्त किया है।
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Author: Vijay Singhal
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