हिदुस्तान 24 तुवि न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। पढ़ाई में पिछड़ रहे कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों का शैक्षिक स्तर बढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत इन बच्चों के लिए 50 दिन के सुधारात्मक प्रशिक्षण (रिमिडियल प्रशिक्षण) की व्यवस्था की गई है। जिसके तहत कमजोर विषयों में विद्यार्थियों का शैक्षिक ज्ञान बढ़ाया जाएगा।
महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद ने बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए रिमिडयल शिक्षण कार्यक्रम के आदेश दिए हैं। इसके तहत हिंदी और गणित विषय में कमजोर बच्चों का शैक्षिक ज्ञान विकसित करने और उनका स्तर बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। 50 दिन के इस प्रशिक्षण के लिए शिक्षक संदर्शिकाएं तैयार कर ली गई हैं। इनके आधार पर शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के अंतर्गत कक्षा 6 से 8 तक की कक्षा में अध्ययनरत समस्त बच्चों में पहले हिंदी और गणित विषय में वास्तविक अधिगम स्तर की पहचान की जाएगी। शिक्षकों द्वारा प्रश्नपत्र के माध्यम से बच्चों का बेसलाइन आंकलन किया जाएगा। इसमें पूर्व की कक्षाओं से संबंधित प्रश्न ही पूछे जाएंगे। प्रश्नपत्र के परिणामों के आधार पर कमजोर विद्यार्थियों का आंकलन कर लिया जाएगा। ऐसे बच्चों की सूची 25 अप्रैल तक तैयार करने के निर्देश हैं।
जिसके बाद रिमिडियल कार्यक्रम को प्रभावी किया जाएगा। कमजोर विद्यार्थियों के परिणाम की जानकारी अभिभावकों के साथ भी साझा की जाएगी। ताकि वह भी अपने बच्चों पर अतिरिक्त ध्यान दें और घर में भी पढ़ाई पर ध्यान दें। अभिभावकों को रिमिडियल शिक्षण प्रक्रिया की भी जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के तहत कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी। उनके लिए कार्यपुस्तिकाएं तैयार की जाएंगी। प्रतिदिन बच्चों से कमजोर विषयों का अभ्यास कराया जाएगा। इन्हें बैक कक्षाओं में भी बिठाया जा सकता है। कोरोना काल में लगे लॉकडाउन में विद्यालय भी बंद थे। लगभग 2 वर्ष बाद जब स्कूल खुले तो छोटे-छोटे बच्चे कुछ विषयों में अपनी पकड़ खो चुके थे। जिसके बाद रिमिडियल शिक्षण प्रक्रिया अस्तित्व में आई। इसे उपचारात्मक प्रशिक्षण भी कहा जाता है। इसके तहत कमजोर विषयों में बच्चों को तेज करने के प्रयास किए जाते हैं ताकि बच्चा आगे चलकर पढ़ाई में न पिछड़ जाए। वीरेंद्र कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा, 50 दिन की रिमिडियल शिक्षण प्रक्रिया के आदेश मिल चुके हैं। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने विकासखंड के विद्यालयों में इसे लागे कराने के आदेश दे दिए गए हैं। कमजोर बच्चों के शैक्षिक स्तर को सुधारने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद ने बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए रिमिडयल शिक्षण कार्यक्रम के आदेश दिए हैं। इसके तहत हिंदी और गणित विषय में कमजोर बच्चों का शैक्षिक ज्ञान विकसित करने और उनका स्तर बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। 50 दिन के इस प्रशिक्षण के लिए शिक्षक संदर्शिकाएं तैयार कर ली गई हैं। इनके आधार पर शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के अंतर्गत कक्षा 6 से 8 तक की कक्षा में अध्ययनरत समस्त बच्चों में पहले हिंदी और गणित विषय में वास्तविक अधिगम स्तर की पहचान की जाएगी। शिक्षकों द्वारा प्रश्नपत्र के माध्यम से बच्चों का बेसलाइन आंकलन किया जाएगा। इसमें पूर्व की कक्षाओं से संबंधित प्रश्न ही पूछे जाएंगे। प्रश्नपत्र के परिणामों के आधार पर कमजोर विद्यार्थियों का आंकलन कर लिया जाएगा। ऐसे बच्चों की सूची 25 अप्रैल तक तैयार करने के निर्देश हैं।
जिसके बाद रिमिडियल कार्यक्रम को प्रभावी किया जाएगा। कमजोर विद्यार्थियों के परिणाम की जानकारी अभिभावकों के साथ भी साझा की जाएगी। ताकि वह भी अपने बच्चों पर अतिरिक्त ध्यान दें और घर में भी पढ़ाई पर ध्यान दें। अभिभावकों को रिमिडियल शिक्षण प्रक्रिया की भी जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के तहत कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी। उनके लिए कार्यपुस्तिकाएं तैयार की जाएंगी। प्रतिदिन बच्चों से कमजोर विषयों का अभ्यास कराया जाएगा। इन्हें बैक कक्षाओं में भी बिठाया जा सकता है। कोरोना काल में लगे लॉकडाउन में विद्यालय भी बंद थे। लगभग 2 वर्ष बाद जब स्कूल खुले तो छोटे-छोटे बच्चे कुछ विषयों में अपनी पकड़ खो चुके थे। जिसके बाद रिमिडियल शिक्षण प्रक्रिया अस्तित्व में आई। इसे उपचारात्मक प्रशिक्षण भी कहा जाता है। इसके तहत कमजोर विषयों में बच्चों को तेज करने के प्रयास किए जाते हैं ताकि बच्चा आगे चलकर पढ़ाई में न पिछड़ जाए। वीरेंद्र कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा, 50 दिन की रिमिडियल शिक्षण प्रक्रिया के आदेश मिल चुके हैं। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने विकासखंड के विद्यालयों में इसे लागे कराने के आदेश दे दिए गए हैं। कमजोर बच्चों के शैक्षिक स्तर को सुधारने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
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Author: Vijay Singhal
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