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ब्रज के रसिक संत को भाई मानतीं थीं आशा भोसले, वृंदावन भी आ चुकी हैं।

ByVijay Singhal

Apr 13, 2026
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में अपने सुरीले स्वर से विश्वभर में अपनी पहचान बनाने वाली महान गायिका आशा भोसले के निधन के बाद फिल्म जगत शोक में डूबा है, वहीं ब्रजभूमि में भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी जा रही है। वृंदावन के लोगों के लिए वह केवल एक प्रसिद्ध कलाकार ही नहीं बल्कि श्रद्धा और भक्ति से जुड़ी एक भावनात्मक हस्ती भी थीं।

गायिका आशा भोसले का ब्रज के रसिक संत हितश्री आशुदाराम से गहरा आत्मीय संबंध था। वह उन्हें अपना भाई मानती थीं और इसी स्नेह के चलते वर्ष 1960 में वह वृंदावन आईं थीं। इस दौरान उन्होंने बांके बिहारी कॉलोनी स्थित संत की कुटिया में समय बिताया और ब्रज की भक्ति परंपरा को करीब से अनुभव किया। ब्रज रसिक गायक जेएसआर मधुकर के अनुसार उनके परिवार में आज भी आशा भोसले से जुड़ी कई यादें सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि उस दौर में लता मंगेशकर भी वृंदावन आई थीं और दोनों बहनों ने यहां के आध्यात्मिक वातावरण को महसूस किया था। वृंदावन प्रवास के दौरान आशा भोसले ने प्रसिद्ध निधिवन मंदिर के दर्शन भी किए थे, जो उनकी गहरी आस्था का प्रतीक है।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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