हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में निरंकारी सतगुरू माता सुदीक्षा जी महाराज के दर्शन एवं आशीर्वचन की आस लिए श्रद्धालु भक्तों का हर कदम वृंदावन के सनसिटी अनंतम की ओर बढ़ रहा है, जहां रविवार को निरंकारी सन्त समागम है। दूर-दराज के भक्तों का आना भी शुरू हो गया है। सतगुरू माता सुदीक्षा जी के आगमन पर हर भक्त के चेहरे पर उमंग, उत्साह और उल्लास साफ दिखायी दे रहा है आखिर भक्तों को मथुरा में पहली बार सद्गुरू के दीदार का मौका जो मिल रहा हैं। शनिवार को दिल्ली से आए कैंद्रिय सेवादल मुख्य संचालक एसके जुनेजा जी, मथुरा जोन के जोनल इंचार्ज एच के अरोड़ा, क्षेत्रीय सेवादल संचालक अजय यादव, आगरा के क्षेत्रीय संचालक महेश चौहान, स्थानीय संचालक अशोक दयालु और शिक्षक योगेश के दिशा निर्देश पर चार दिनों से चल रही संत समागम की तैयारियों को अन्तिम रूप दे दिया गया है। कार्यक्रम प्रभारी मथुरा जोन के जोनल इंचार्ज एच के अरोड़ा जी ने बताया कि निरंकारी संत समागम का मुख्य आकर्षण आध्यात्मिक सत्संग है जिसका शुभारम्भ रविवार दोपहर 2 बजे होगा। सर्वप्रथम विभिन्न स्थानों से आये विद्वान वक्ता ईश्वर बोध पर व्याख्यान देंगे। वहीं प्रसिद्ध गीतकार, कलाकार भक्त प्रेरणादायक भजन प्रस्तुत करेंगे। समागम के अंतिम भाग में निरंकारी सद्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज का सम्बोधन होगा । समागम में भक्तों के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा गई है। जैत कट नेशनल हाईवे-19, वृंदावन स्थित सनसिटी अनंतम पर आयोजित संत समागम में प्रदेश के कई नगरों सहित दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश के हजारों भक्तों के आगमन का अनुमान हैं। निरंकारी सतगुरू की शिक्षाओं के परिणाम स्वरूप उनके अनुयायी जाति, धर्म, बोली, पहनावे के भेद को भुलाकर एक-दूसरे के चरण स्पर्श करते हैं जो समानता का जीता जागता वास्तविक एवं व्यवहारिक उदाहरण हैं। एक भक्त एस के रावत कहते हैं कि निरंकारी मिशन में किसी की जाति या मजहब को नहीं बदला जाता, बल्कि भावनाएं परिवर्तित की जाती हैं। मिशन के मूल सिद्वान्त ‘‘ एक ज्योति है सबके अन्दर, नर है चाहे नारी है, ब्राह्मण क्षत्रिय वैष्य हरिजन, प्रभु की रचना सारी है ‘‘ में समानता का ही दर्शन होता है। निरंकारी सतगुरू ब्रह्मज्ञान द्वारा हर इंसान को आत्मिक मुक्ति प्रदान कर रहे हैं। स्थानीय मीडिया सहायक किशोर स्वर्ण बताते हैं कि विश्व प्रसिद्व आध्यात्मिक जागरूकता का मंच “ संत निरंकारी मिशन ” कोई धर्म या सम्प्रदाय नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विचारधारा है, जहां अनुयायियों को जाति धर्म से उपर उठकर एक ईश्वर को मानने की शिक्षा दी जाती है। समाज में समानता का भाव आए, इसके लिए मिशन से जुड़े भक्त तमाम सामाजिक कार्य करते हैं। यही वजह है कि आज इसके अनुयायियों की संख्या करोड़ों में है। केवल उत्तर प्रदेश में ही लगभग पांच लाख निरंकारी भक्त हैं, जो मानव सेवा को अपना धर्म मानते हुए समानता लाने में जुटे हैं। मानवता का गुलदस्ता संत निरंकारी मिशन अपनी मानवता की खुशबू से सारे जगत को सुगंधित कर रहा है। ऐसी भावना, मंगल कामना विश्व के विभिन्न राष्ट्रों में रहने वाले निरंकारी संत महात्मा कर रहे हैं । 1929 में बाबा बूटा सिंह जी से शुरू हुआ संत निरंकारी मिशन का इतिहास बाबा अवतार सिंह जी, बाबा गुरुवचन सिंह जी, बाबा हरदेव सिंह जी और माता सविंदर हरदेव जी महाराज के पावन सानिध्य में निरंतर मानवता का कल्याण करने से भरा है। वर्तमान में छठे सगुरू के रूप में पुज्य माता सुदीक्षा जी महाराज का मार्गदर्शन निरंकारी जगत को मिल रहा है। विश्व के अनेकों देश तथा भारत के सभी प्रांतों-नगरों के साथ बृजभूमि में भी संत निरंकारी मिशन के प्रेरक संदेश और शिक्षाओं को पसंद किया जा रहा है। एक भक्त मूलचंद कर्दम के अनुसार निरंकारी मिशन का निश्चित मत है कि ब्रह्मानुभूति में ही मनुष्य योनि की सार्थकता है। साधारणतया भक्ति भगवान को पाने के लिये की जाती है, जबकि निरंकारी मिशन इस सनातन सिद्वांत में विश्वास रखता है कि “पहले भगवान को जानो, तभी भक्ति हो पाएगी“। भगवान को जानने के बाद ही हममें दैवी गुणों का प्रवेश हो पाएगा। प्राणिमात्र में सर्वव्यापी परमात्मा का अनुभव करके ही द्वैत की भावना मिटेगी, अपनत्व भाव जगेगा और प्यार उत्पन्न होगा।
