हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ़ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में मंच पर संगीत की लय उठती है, हाथों की मुद्राएं आकार लेती हैं और चेहरे पर उभरते भाव मानो किसी पवित्र कथा के पन्ने खोलने लगते हैं। कभी शांत, निर्मल जलधारा का प्रवाह तो कभी भक्ति में डूबा समर्पण। सांसद व अभिनेत्री हेमा मालिनी जब नृत्य की भाव-भंगिमाओं से मां गंगा की महिमा को साकार करती हैं, तो मंच पर केवल नृत्य नहीं होता, आस्था का एक प्रवाह आकार लेने लगता है।
हर मुद्रा में श्रद्धा, हर भाव में भक्ति और हर प्रस्तुति में भारतीय संस्कृति की गहरी छाप। शुक्रवार को वृंदावन के स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में नृत्य नाटिका ‘गंगा’ के मंचन ने दर्शकों को कला और अध्यात्म के इसी भावलोक से जोड़ा।
11 दिवसीय ब्रज रज उत्सव का प्रारंभ भी सांसद हेमा की इसी प्रस्तुति से हुआ। शाम छह बजे से ही दर्शक जुटने लगी। करीब पौने सात बजे सांसद हेमा मालिनी अपने तीन दर्जन सहयोगी कलाकारों के साथ मंच पर आईं। फिर शुरू हुआ मंचन। भगीरथ की साधना से लेकर पूर्वजों के उद्धार की अभिलाषा तक, हर प्रसंग नृत्य और संगीत के सहारे खुलता गया। करीब पौने दो घंटे की नृत्य नाटिका कथा का भाव केवल अतीत तक सीमित नहीं रहा। गंगा की वर्तमान दुर्दशा और प्रदूषण के दृश्यों ने श्रद्धा के बीच एक गंभीर सवाल भी खड़ा किया। जिस धारा को पवित्र मानकर पूजा जाता है, उसे स्वच्छ और अविरल रखने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? प्रस्तुति ने गंगा के साथ यमुना सहित सभी नदियों के संरक्षण का संदेश दिया। नृत्य नाटिका से पहले गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, संत विजय कौशल महाराज,राज्यसभा सदस्य तेजवीर सिंह, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र और सीईओ लक्ष्मी नागप्पन ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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मंच पर ‘गंगा’ बनकर उतरीं हेमा मालिनी, बस देखते ही रह गए दर्शक; युवा अभिनेत्रियों को मात
