हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। शहर के रिहायशी इलाकों में आवासीय भवनों का तेजी से व्यावसायिक उपयोग बढ़ रहा है। आवासीय नक्शे पर मंजूर कराए गए भवनों में कोचिंग सेंटर, होटल, रेस्टोरेंट, शोरूम और जनरल स्टोर संचालित हो रहे हैं। वहीं इन भवनों का गृहकर (हाउस टैक्स) नगर निगम में पुरानी आवासीय श्रेणी के तहत ही जमा कराया जा रहा है। नगर निगम में कुल 1.79 लाख भवन दर्ज हैं। इनमें से महज 40 हजार भवनों का ही टैक्स व्यावसायिक श्रेणी में निर्धारण है। बीएसए रोड, गोविंद नगर, कृष्णापुरी, धौली प्याऊ और डैंपियर नगर समेत अन्य क्षेत्रों में कई मकान मालिकों ने अपने भवन को किराये पर दे रखा है। इन मकानों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। हालांकि प्रशासन की संयुक्त टीम ने ऐसे अवैध उपयोग के खिलाफ नोटिस भेजने और सीलिंग की कार्रवाई कर रही है लेकिन नगर निगम का टैक्स विभाग मौन है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी नरेंद्र सिंह यादव के मुताबिक वास्तविक उपयोग के आधार पर सभी भवनों का दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ऐसे सभी भवनों को व्यावसायिक श्रेणी में शामिल करते हुए उनके हाउस टैक्स के बिलों को संशोधित किया जाएगा ताकि व्यावसायिक श्रेणी के आधार पर टैक्सी की वसूली हो सके। आवासीय भवन की तुलना में व्यावसायिक भवन पर पांच गुना कर लगाया जाता है। अगर 100 वर्ग गज के आवासीय भवन पर 10 हजार रुपये टैक्स लगता है तो व्यावसायिक भवन पर पांच गुना अर्थात 50 हजार रुपये का कर लगाया जाएगा। इससे बचने के लिए ही आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
7455095736
Author: Vijay Singhal
50% LikesVS
50% Dislikes
