हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। रबी फसल की बुवाई अक्तूबर से शुरू हो गई है। इसके बाद भी जरूरत के मुताबिक किसानों को डीएपी नहीं मिल पा रही है। खाद न होने से ज्यादातर सहकारी समितियों पर ताला लटका हुआ है। ऐसे में किसान निराश होकर वापस लौट रहे हैं। किसानों को चिंता सता रही है कि उन्हें खाद नहीं मिली तो गेहूं की बुवाई कैसे होगी। रबी के सीजन में डीएपी की मांग 21 हजार 407 मीट्रिक टन से ज्यादा है। इसके बाद भी अब तक 12 हजार 668 मीट्रिक टन डीएपी जिले को मिल सकी है। इसमें से 11 हजार 548 एमटी का वितरण हो चुका है। वहीं दूसरी तरफ एनपीके खाद 8003 एमटी विभाग में आई है। जिसमें से 6779 एमटी का का वितरण किया जा चुका हैं। सहकारी समिति के सहायक निबंधक विवेक कौशल ने बताया कि अलीगढ़ से 500 टन डीएपी खाद आ रही है, जैसे ही आएगी उसके बाद समितियों से इसका वितरण कराया जाएगा। जिले में गेहूं की बुवाई 1.87 लाख हेक्टेयर में होती है। गेहूं के बीज पर सरकार किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी देती है। जिससे किसान अब बीज सरकारी बीज भंडार से ही लेना पसंद करते हैं। राजकीय कृषि बीज भंडार पर बीज का अभाव है। इस साल 8700 क्विंटल बीज का लक्ष्य दिया गया था। इसका वितरण दस ब्लॉकों की गोदामों से किया जा चुका हैं, किसानों की मांग बढ़ने के चलते 2000 क्विंटल के लिए पत्र लिखा गया था। जिसमें से 1000 क्विंटल की स्वीकृत कृषि विभाग को मिली है। जल्द ही यह बीज अब सरकारी गोदामों पर पहुंच जाएगा। अश्विनी कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी ने कहा, जिले में डीएपी की कमी चल रही है, लगातार मांग को लेकर पत्र लिखा गया है। जल्द ही डीएपी आने वाली है। जिसको सहकारी समितियों से वितरण किया जाएगा। वहीं गेहूं का बीज लक्ष्य के अनुसार पूरा वितरण हो चुका है। दो हजार क्विंटल की मांग की गई है, जिसमें से एक हजार क्विंटल की स्वीकृत मिली है।
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Author: Vijay Singhal
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