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गौ को शीघ्रातिशीघ्र राष्ट्र माता घोषित करे भारत सरकार : महामंडलेश्वर डॉ. सत्यानंद सरस्वती महाराज अधिकारी गुरुजी

ByVijay Singhal

Nov 11, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृन्दावन में परिक्रमा मार्ग/वंशीवट क्षेत्र स्थित चरणाश्रम (पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा) में पूज्य हनुमानजी वाले बाबा की सद्प्रेरणा से दिव्य व भव्य अष्टम पाटोत्सव और अन्नकूट महोत्सव अत्यंत श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। जिसके अंतर्गत गोपाष्टमी के पावन उपलक्ष्य में प्रातः काल वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य संतों व भक्तों के द्वारा गौमाता का पूजन-अर्चन किया गया। तत्पश्चात सरस भजन संध्या का आयोजन हुआ।जिसमें कई प्रख्यात भजन गायकों द्वारा श्रीराधा-कृष्ण की महिमा से ओतप्रोत भजनों का गायन किया गया।इसके अलावा वृद्ध, असहाय एवं निराश्रित महिलाओं को वस्त्र और दक्षिणा आदि का वितरण किया गया। इस अवसर पर आयोजित संत-विद्वत सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए चतु:संप्रदाय के श्रीमहंत बाबा फूलडोल बिहारीदास महाराज ने कहा कि गौमाता में चौबीस कोटि देवी- देवता निवास करते हैं।गौ माता का पूजन करने से उनकी कृपा हम पर बरसती है।इसीलिए हम सभी को पूर्ण समर्पण के साथ गौ माता की सेवा करनी चाहिए। चरणाश्रम के अधिष्ठाता महामंडलेश्वर डॉ. सत्यानंद सरस्वती महाराज “अधिकारी गुरुजी” ने कहा कि प्राचीन भारतीय वैदिक सनातन संस्कृति में गौ को सर्वपूज्य माना गया है।गौमाता का दूध अमृत तुल्य है।इसीलिए हम भारत सरकार से यह मांग करते हैं, कि वो शीघ्रातिशीघ्र गौ को राष्ट्र माता घोषित करे।
वरिष्ट साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि हमारा दुर्भाग्य है कि आज हमारी गौमाता भूख से व्याकुल होकर गली-गली में भटक रही है।साथ ही गंदगी, प्लास्टिक आदि खाने को मजबूर है।इसके अलावा कसाई घरों में नित्य गौवध होने के कारण हमारे देश का बहुमूल्य गौवंश दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है। महोत्सव में जगद्गुरु स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद शास्त्री महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी चित्तप्रकासानंद महाराज, धर्मरत्न स्वामी बलरामाचार्य महाराज, भागवताचार्य रामविलास चतुर्वेदी, महामंडलेश्वर नवल गिरि महाराज, महंत लाड़िली दास महाराज, डॉ.  राधाकांत शर्मा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।संचालन महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद शास्त्री महाराज ने किया।महोत्सव का समापन संत, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं अन्नकूट प्रसाद (भंडारा) के साथ हुआ।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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