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मथुरा। तत्कालीन इंस्पेक्टर को दस साल की कैद, चार पुलिसकर्मी रिहा

ByVijay Singhal

Jan 16, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज़ चीफ विजय सिंघल
मथुरा। हाईवे थाना क्षेत्र में 24 वर्ष पहले बहुचर्चित विजय इक्का हत्याकांड में सोमवार को एडीजे चतुर्थ ने फैसला सुना दिया। एडीजे चतुर्थ डॉ. पल्लवी अग्रवाल की अदालत ने हाईवे थाने के पूर्व प्रभारी को दस वर्ष की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इसी मामले में आरोपित चार अन्य पुलिसकर्मियों को कोर्ट ने बरी किया है। सहायक शासकीय अधिवक्ता हेमेंद्र भारद्वाज ने बताया, हाईवे थाना क्षेत्र के सेंट फ्रांसिस स्कूल में सात जून 2000 को डकैती की वारदात हुई थी। शिक्षक ब्रदर जार्ज क्रूजी की बेरहमी से हत्या कर दी थी। शक के आधार पर थाना हाईवे पुलिस ने स्कूल के रसोइया विजय इक्का को पूछताछ के लिए उठा लिया था। पुलिस लाइन के बाथरूम में 17 जून 2000 को विजय इक्का का शव लटका मिला। पुलिस हिरासत में हुई विजय इक्का की मृत्यु का मामला गरमा गया। तत्कालीन हाईवे थाना प्रभारी सुनील कुमार शर्मा, हेड कांस्टेबल राधेश्याम सिंह, उपनिरीक्षक जमील मोहम्मद रावत निवासी ग्राम गंगावली थाना बीवीनगर बुलंदशहर, सिपाही दिनेश उपाध्याय निवासी मजटीला थाना ढकी आगरा, कांस्टेबल क्लर्क रामानंद यादव निवासी मटपुरा थाना सैफई इटावा के खिलाफ 18 जून 2000 को पुलिस हिरासत में साजिश के तहत रसोइया की हत्या किए जाने का मुकदमा थाना सदर बाजार में दर्ज हुआ था। थाना सदर पुलिस ने आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तीन वर्ष बाद तत्कालीन थाना प्रभारी जमानत पर बाहर आ गए। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे चतुर्थ डाॅ. पल्लवी की अदालत में हुई। कोर्ट ने सुनील को दस वर्ष के कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने राधेश्याम सिंह, जमील मोहम्मद रावत, दिनेश उपाध्याय और रामानंद यादव को बरी कर दिया है। निर्णय के बाद अदालत ने सुनील का सजा भुगतने के लिए वारंट बनाकर जेल भेज दिया है।

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