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प्रधान पुत्र को बना दिया मनरेगा मजदूर, एक भी ईंट उठाई नहीं, मजदूरी दी पूरी

ByVijay Singhal

Jan 10, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। मनरेगा में मजदूरी करते हुए कोई एलएलबी तक पढ़ाई भी करता है तो, उसकी सफलता की मिसाल दी जाती है, लेकिन पिता प्रधान और बेटा मनरेगा मजूदर होते हुए ऐसा करता है तो समझ लीजिए दाल में कुछ काला है। राया विकासखंड की ग्राम पंचायत बिरहना में ऐसा ही मामला सामने आया है। प्रधान पुत्र को कागजों में मनरेगा मजदूर बना दिया। इतना ही नहीं, उसे 2007 से 2011 तक विभिन्न दिवसों पर फर्जी तरीके से मजदूरी कार्य में लिप्त दिखाते हुए 10100 रुपये का भुगतान भी कर दिया।मामले की शिकायत पर सीडीओ ने दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई। कमेटी ने आरोपों को सही पाया। अब सीडीओ ने रिकवरी आदेश जारी किया है। इधर, डीसी मनरेगा ने जांच रिपोर्ट पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। वहीं, प्रधान का कहना है कि उसके बेटे ने एलएलबी की पढ़ाई करने के दौरान ही मजदूरी भी की थी। बिरहना गांव निवासी जगदीश मोहन प्रसाद ने मुख्य विकास अधिकारी से शिकायत की कि ग्राम प्रधान वीरेंद्र सिंह के बेटे अजवेंद्र ने बीएसए कॉलेज से वर्ष 2007 से 2010 तक एलएलबी की पढ़ाई की। इस दौरान उसके खाते में मनरेगा के तहत मजदूरी का भुगतान भी किया गया। मनरेगा मजदूर की फर्जी हाजिरी लगाकर राजकीय धनराशि का गबन किया गया। जिला कृषि अधिकारी और अवर अभियंता लघु सिंचाई को मामले की जांच सौंपी गई। इस दौरान सामने आया कि अजवेंद्र के एसबीआई कूम्हां के बैंक खाते में मनरेगा के तहत मजदूरी का भुगतान हुआ है। 225 दिन मजदूरी की जांच में पता चला कि वर्ष 2008-09 में अजवेंद्र ने 25 दिन मिट्टी कार्य और तालाब खुदाई का कार्य किया। वर्ष 2009-10 में 76 दिन तालाब खुदाई और खरंजा निर्माण में मजदूरी की। वर्ष 2010-11 में 110 दिन मजदूरी की। इसके बाद वर्ष 2011-12 में 14 दिन मजदूरी कार्य किया। 2009-10 एलएलबी फाइनल की

जांच टीम ने बीएसए कॉलेज के विधि विभाग के विभागाध्यक्ष से जानकारी जुटाई तो सामने आया कि अजवेंद्र ने वर्ष 2007-08 में विधि प्रथम वर्ष, 2008-09 में द्वितीय वर्ष और सत्र 2009-10 में तृतीय वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इससे पता चला कि पढ़ाई और मजदूरी एक साथ की गई है। सीडीओ को दी गई रिपोर्ट में लिखा गया है कि ये मनरेगा नियमों के अनुरूप नहीं है। पढ़ाई की अवधि में अजवेंद्र सिंह ने फर्जी तरीके से मस्टररोल में अपना नाम अंकित कराकर मजदूरी के 10100 रुपये अपने खाते में प्राप्त किए, जो गबन का स्पष्ट प्रमाण है। जांच रिपोर्ट में अजवेंद्र से वसूली और तत्कालीन प्रधान वीरेंद्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। उधर, दो सदस्यीय जांच टीम ने रिपोर्ट बनाकर सीडीओ को सौंप दी है, लेकिन डीसी मनरेगा विजय पांडेय इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट अधूरी है। पुन: जांच के लिए कहा गया है। पूरे मामले पर प्रधान वीरेंद्र ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि उनके बेटे ने मनरेगा मजदूरी की है। वह सुबह एलएलबी की पढ़ाई करने जाता था। इसके बाद गांव जाकर मनरेगा कार्यों में मजदूरी करता था। अश्विनी सिंह, जिला कृषि अधिकारी ने कहा जांच के दौरान जो भी तथ्य प्रकाश में आए। उनके आधार पर जांच रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंप दी गई है।

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