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व्रन्दावन में झूलन उत्सव का हुआ समापन,रंगनाथ जी विराजे चांदी के झूले में,राधा बल्लभ झूले फलों के झूले में

ByVijay Singhal

Sep 1, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन के प्रसिद्ध राधा बल्लभ मंदिर में भी सावन पूर्णिमा को झूलन उत्सव का समापन हो गया। यहां भगवान राधा बल्लभ लाल ने जगमोहन में डाले गए झूले में विराजमान हो कर भक्तों को दर्शन दिए। भगवान राधा बल्लभ लाल कभी फूलों से बने तो कभी मोर पंखों से बनाए गए झूले में विराजमान हुए। सावन पूर्णिमा पर झूलन उत्सव के अंतिम दिन भगवान राधा बल्लभ को फलों से बनाए गए झूले में विराजमान किया गया। झूलन उत्सव के अंतिम दिन राधा बल्लभ मंदिर में फलों से झूला बनाया गया। करीब 3 कुंतल फलों से बनाए गए झूले में भगवान राधा बल्लभ लाल को विराजमान किया गया तो ऐसा लगा जैसे वह किसी बगीचा में झूला झूलते हुए दर्शन दे रहे हों। भगवान राधा बल्लभ का फलों का झूला बनाने में 6 तरह के फलों का प्रयोग किया गया। इनमें संतरा, सेब,केला,आम,अमरूद और पाइन एपल थे। सेब और अमरूद से जहां झूले की चार डोरियां बनाई गई वहीं अन्य फलों से झूले को सजाया गया। मंदिर के गोस्वामी मोहित मराल ने बताया कि राधा बल्लभ लाल की लाड और भाव से सेवा की जाती है। भक्तों का जैसा भाव होता है वह अपने आराध्य को उसी तरह का लाड लड़ाते हैं। ब्रज के मंदिरों में चल रहा झूला उत्सव का समापन हो गया है। यहां के मंदिरों में हरियाली तीज से भगवान को झूला में विराजमान करने की परंपरा है। मथुरा वृंदावन के अधिकतर मंदिरों में हरियाली तीज से लेकर सावन पूर्णिमा तक झूला डाला जाता है। सावन पूर्णिमा पर जहां रंगनाथ भगवान चांदी के झूले में विराजमान हुए वहीं भगवान राधा बल्लभ फलों से बने झूले में विराजमान हो कर झूले। उत्तर भारत के विशालतम श्री रंगनाथ मंदिर में भगवान श्री गोदा रंगमन्नार ने 13 दिन तक झूला में विराजमान हो कर भक्तों को दर्शन दिए। गरुड़ स्तंभ के समीप झूला मंडप में हरियाली तीज के अवसर पर झूला डाला गया जहां भगवान रंगनाथ माता गोदा जी के साथ झूला में विराजमान होते और भक्तों को दर्शन देते। रंगनाथ मंदिर में भगवान के लिए डाला गया झूला बेहद खास था। यहां 200 किलो चांदी से बने झूले में भगवान को हरियाली तीज से लेकर सावन पूर्णिमा तक शाम के समय विराजमान कराया जाता है। भगवान की अलौकिक क्षवि और झूले पर की गई कलाकारी भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। झूला उत्सव के अंतिम दिन सावन पूर्णिमा को भक्तों ने भगवान की आराधना डांडिया नृत्य के जरिए की। महिला भक्तों ने भजनों पर डांडिया नृत्य किया। 25 महिला भक्तों ने भगवान के सामने 1 घंटे तक डांडिया नृत्य किया और भगवान से सभी की खुशहाली की कामना की।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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