हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में जिला संयुक्त चिकित्सालय सौ शैय्या की बिल्डिंग तो अच्छी बना दी, आधुनिक संसाधन भी हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी आज तक पूरी नहीं हो पाई है। संविदा के बाद अब इंटर्नशिप के लिए आए प्रशिक्षुओं के माध्यम से स्टॉफ की कमी को पूरा किया जा रहा है। सौ बेड वाले इस अस्पताल में रोजाना 650-700 मरीजों की ओपीडी होती है। सप्ताह के आखिरी दिन में यह आंकड़ा 800 से अधिक हो जाता है। यहां मथुरा और उससे जुड़े जिलों के मरीज भी इलाज के लिए आते हैं, वहां 27 डॉक्टरों की जगह के सापेक्ष 10 डॉक्टर ही कार्य कर रहे हैं। इनमें चार स्थायी हैं और छह संविदा पर हैं। स्थायी डॉक्टरों में एक डेंटल और बाकी तीन एमरजेंसी मेडिकल अफसर हैं। संविदा में एक पैथोलॉजिस्ट, एक हड्डी, एक ईएनटी, एक एमरजेंसी मेडिकल अफसर और दो गायनोलोजिस्ट हैं। कुछ समय पहले तक डॉक्टरों की संख्या 16 से 18 थी, लेकिन इनमें से तीन डॉक्टर सेवानिवृत्त हो गए और कई स्थानांतरण हो गए। अस्पताल में एक भी स्थायी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। अब आठ डॉक्टर जो पीजी कर रहे हैं वह प्रशिक्षु के तौर पर यहां तीन माह तक काम करेंगे। उसके बाद अन्य किसी मेडिकल संस्थान से प्रशिक्षुओं को यहां भेजा जाएगा। इन आठ डॉक्टरों में दो गायनोलोजिस्ट, एक ऑर्थो, दो मेडिसन, एक सर्जन और दो अन्य डॉक्टर शामिल हैं। सीएमएस डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट रेजीडेंसल प्रोग्राम (डीआरपी) के तहत आठ डॉक्टरों का बैच आ चुका है, तीन महीने बाद बैच बदलेगा, इनके आने से लोड कम होगा और मरीजों को अधिक लाभ मिल सकेगा।
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Author: Vijay Singhal
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