हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में मुगल बादशाह औरंगजेब ने मुत्त में केवल श्रीकृष्ण जन्म स्थान परिसर में स्थित ठाकुर केशवदेव मंदिर को ही नहीं तोड़ा, प्राचीन गोविंद देव मंदिर को भी तुड़वा दिया था।मंदिर के शिखर पर एक मस्जिद का निर्माण करवा दिया गया। इसे कलंदरी मस्जिद कहा जाता था। बाद में इस मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और ये मंदिर एएसएआई के संरक्षण में है। वृंदावन के सप्त देवालय में शामिल गोविंद देव मंदिर पत्थरों से बना है। ये स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। गोमा टीले पर बने इस मंदिर को चैतन्य महाप्रभु के अनुयायी शाद्गोस्वामी में प्रमुख रूप गोस्वामी की प्रेरणा से वर्ष 1590 में आमेर (जयपुर) के राजा मानसिंह ने जांच की थी। 1669 में जब मुगल बादशाह औरंगजेब की हिंदू देवी-देवताओं के मंदिरों को लेकर दमनकारी नीति शुरू हुई, तो गोविंद देव जी के विग्रह को काम करने वाले आमेर ले गए। वर्तमान में भी श्रीविग्रह विराजमान है। वृंदावन के गोदाविहार स्थित ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मी नारायण तिवारी का दावा है कि विग्रह जाने के बाद गोविंद देव मंदिर के शिखर भाग को औरंगजेब ने तोड़ दिया। इसके ऊपरी हिस्से में एक मस्जिद का निर्माण किया गया। इसे स्थानीय लोग कलंदरी जिला कहते थे। जब ब्रिटिश हुकूमत आई तो मंदिर हर समय था। जिले में अंग्रेज कलक्टर आए एफएस ग्राउस ने 1870 में इस मंदिर के जीर्णोद्धार की जांच की। एफ़.एस. ग्राउस ने अपनी पुस्तक का विशेष रूप से एक विस्तृत संस्मरण में उल्लेख किया है। तिवारी कथन हैं कि प्रसिद्ध गोपाल कवि राय द्वारा लिखी गई पुस्तक वृंदावन धाम अनुरागी में भी इसका उल्लेख है। बाद में ये मंदिर एएसएआई के योग्य हो गया और इसमें एएसएआई द्वारा वर्तमान विग्रह की स्थापना की गई। ब्रज संस्कृति खोज संस्थान के सचिव लक्ष्मी नारायण तिवारी के दावे हैं कि औरंगजेब ने जब ब्रज के मंदिरों का विध्वंस शुरू किया तो राधा वल्लभ मंदिर पर भी आक्रमण किया। मंदिर के शिखर का हिस्सा तोड़ दिया। इसी दौरान हरिवंश महाप्रभ के विग्रह राधा वल्लभ जी को वृंदावन से छिपाकर सेवायत कामवन ले गए। उस वक्त कामवन मुगल राज्य की सीमा से बाहर था। 114 साल के बाद 1784 में राधा वल्लभ जी को पुन: वृंदावन लाया गया था। लक्ष्मी नारायण तिवारी के दावे किवदंती है कि गोविंद देव मंदिर के शिखर पर घृत का दीप जलता था। ये दीप काफी दूर से दिखाई देता है। इससे औरंगजेब चिढ़ गया था और उसने मंदिर को तुड़वा दिया।
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Author: Vijay Singhal
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