हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ़ विजय सिंघल
मथुरा। नगर निगम से महापौर विनोद अग्रवाल की दूरी का असर अब विकास कार्यों पर दिखने लगा है। निगम की बोर्ड बैठक न होने से वार्ड-33 में मेजर ध्यानचंद मार्ग पर जलनिकासी की समुचित व्यवस्था के लिए बनाए गए पांच करोड़ का प्रस्ताव अधर में लटक गया है। मार्ग निर्माण व जलनिकासी की व्यवस्था न होने से लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। वार्ड -33 में 1300 मीटर लंबे मेजर ध्यानचंद मार्ग का निर्माण वर्ष 2017 में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने कराया था। इसके बाद मथुरा-वृंदावन नगर निगम का गठन हुआ तो यह मार्ग वार्ड-33 के अंतर्गत आ गया। इस दौरान मार्ग के आसपास कई नई कॉलोनियां विकसित हो गईं। इन कॉलोनियों से निकलने वाले पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण नालियों का गंदा पानी इसी मार्ग पर जमा होने लगा। स्थानीय पार्षद अभिजीत चौधरी ने जलनिकासी के लिए नाले और मार्ग निर्माण का पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कराकर अधिकारियों को सौंपा था, लेकिन प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिल सकी। करीब एक माह पहले स्थानीय लोगों ने समस्या को लेकर विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद नगर आयुक्त ओजस्वी राज ने मौके पर पहुंचकर मार्ग का निरीक्षण किया। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया गया कि बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कराकर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। साथ ही वहां पर एक पंप सेट लगाकर जलनिकासी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की कराई गई।हालांकि, पिछले तीन माह से महापौर विनोद अग्रवाल ने नगर निगम से दूरी बना रखी है। इससे बोर्ड बैठक होने पर संकट गहरा गया है।
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मथुरा में विकास के लिए तरस रही कृष्णनगरी
