हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बरसाना में वैलेंटाइन-डे अर्थात प्रेम दिवस। पाश्चात्य संस्कृति का यह दिवस भले ही सप्ताह भर मनाया जाता है। इसके उलट ब्रज में अपने आराध्य को रिझाने के लिए साध्वी व महिला भक्त हर रोज वैलेंनटाइन-डे मनातीं हैं। इसके लिए कोई नृत्य करता है तो किसी ने ठाकुरजी के भजन-पूजन के लिए अपना जीवन ही समर्पित कर दिया। कई युवतियां ठाकुरजी को पति मानकर विवाह भी रचा चुकीं हैं। गोलोकवासी कृपालु महाराज के हजारों शिष्य साधना शिविर में श्रीकृष्ण को रिझाने के लिए नृत्य का सहारा लेते हैं। गहवर वन में गोपियां मीराबाई की तरह नृत्य कर ठाकुरजी को रिझाने की कोशिश करतीं हैं। अपने आराध्य के लिए आंसू भी बहाती हैं। भक्ति में भावविह्वल होकर नृत्य करते हुए कहती हैं कि मेरो तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई. मानमंदिर में कथा वाचक मुरलिका शर्मा बताती हैं कि जहां राधाकृष्ण को प्रसन्न करने की चेष्टा हो, उसी को प्रेम की संज्ञा दी गई है। श्रीकृष्ण प्रेम के सच्चे परम प्रकाशक हैं। कानपुर की ममतादासी ने कहा कि हमारे वैलेंटाइन-डे हमारी युगल सरकार हैं। उदयपुर की मीरा दासी कहती हैं कि सांसारिक प्रेम में सुख-दुख, लाभ-हानि की परवाह रहती है, श्रीकृष्ण की चाहत रखने वाले सुख लाभ के भागी ही रहते हैं। अयोध्या की रहने वाली प्रियेश्वरी ने बताया कि उनके वैलेंटाइन सर्वप्रथम आधात्मिक गुरु माता पिता व श्रीकृष्ण हैं। रमा दासी बताती हैं कि असली प्रेम प्रभु की सेवा से मिलता है। कोटा की नवलश्री ने बताया कि श्री कृष्ण कथा हैं, बाकी सब व्यथा है। जो समय हमारा भगवान के कीर्तन में जाता है, वही हमारा वेलेंटाइन डे है। बाकी सब मोह माया है। झारखंड की श्याम सुंदरदासी बताती हैं कि यह संसार तो सिर्फ एक सपना है, ईश्वर ही सत्य है। ब्रजभूमि की भक्ति से प्रभावित होकर विदेशी भक्त ब्रज भूमि में अपने देश की परंपरा को भूल कर राधाकृष्ण को रिझाने के लिए वेलेंटाइन डे मना रहे हैं।
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