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मथुरा में अफसरों के सरकारी वाहन तेल पर खर्च कर रहे हर महीने 20 लाख

ByVijay Singhal

May 17, 2026
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल

मथुरा। पश्चिम एशिया में युद्ध से चल रहे संकट से निपटने के लिए अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ईधन बचाने की अपील का असर दिखाई देने लगा है। अब अधिकारी या तो वाहन साझा कर सफर कर रहे हैं, या फिर अपने साथ वाहन कम कर दिए हैं। एक अनुमान के मुताबिक अधिकारियों के वाहनों पर ही करीब 20 लाख रुपये का ईधन हर माह खर्च हो रहा है। इनमें पुलिस विभाग के वाहन शामिल नहीं हैं। डीएम के पास चार वाहन हैं, इसके अलावा एडीएम वित्त और प्रशासन पर भी दो से अधिक वाहन हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के लिए 37 सरकारी एवं अनुबंध वाले वाहन हैं। 17 वाहन कलक्ट्रेट अधिकारियों के लिए हैं। सभी पांच तहसीलों में 10 वाहन हैं। एक-एक वाहन एसडीएम, एक-एक तहसीलदार और दो-दो वाहन प्रत्येक तहसील में नायब तहसीलदारों के लिए हैं। इन वाहनों पर करीब 10 लाख रुपये ईधन के रूप में हर माह खर्च होते हैं। राजीव भवन के सरकारी कार्यालयों में 12 वाहन अधिकारियों के लिए लगे हुए हैं। इन पर भी करीब तीन लाख रुपये डीजल-पेट्रोल पर हर माह खर्च होते हैं। ईधन बचाने की अपील के बाद डीएम सीपी सिंह ने वाहन से एस्कार्ट हटा दिया है। पुलिस विभाग के पास 100 से अधिक वाहन हैं, लेकिन इनमें ज्यादातर गश्त में रहते हैं। ऐसे में पुलिस विभाग की दौड़ कम करना मुश्किल है। नगर निगम में 25 नगर निगम की बात करें तो यहां करीब 25 वाहन अधिकारियों के पास हैं। सभी डिप्टी कलक्टरों को भी एक स्थान पर जाने के लिए एक ही वाहन का प्रयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह तहसीलों के अधिकारियों को भी पूल व्यवस्था का पालन करने को कहा गया है। महापौर विनोद अग्रवाल व नगर आयुक्त जग प्रवेश ने अपने एस्कार्ट के दो-दो वाहनों में से एक-एक की कटौती कर दी है। सप्ताह में एक दिन महापौर व नगर आयुक्त कार्यालय आने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन का प्रयोग करेंगे।

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Author: Vijay Singhal

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