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महिला आयोग की अध्यक्ष का आदेश भी पुलिस ने नही माना

ByVijay Singhal

Dec 12, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। एक ही दिन पहले की बात है, जब राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के सामने पेश होकर बेटे ने अपनी मां के जिंदा होने के सबूत पेश किए। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों से जांच कर पीड़ित को न्याय दिलाने के आदेश भी दिए, लेकिन पुलिस ने उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पीड़ित बेटे अपनी 95 साल की वृद्ध मां को व्हील चेयर पर बैठाकर एसपी दफ्तर पहुंचे लेकिन सुनवाई के नाम पर नतीजा शिफर रहा। गौरतलब है कि यह मामला मांट तहसील के गांव सुरीर कला का है। जहां पीड़िता विद्यादेवी की चल-अचल संपत्ति की रजिस्टर्ड वसीयत 18 मार्च 1975 को उनके पिता निद्धा सिंह ने की थी। उनके कोई पुत्र नहीं था और उनकी संपत्ति पर खानदानी भाई गुंडागर्दी के बल पर कब्जा करना चाहते थे। निद्धा सिंह की मृत्यु 16 सितंबर 76 को हो गई। पिता ने मृत्यु से पूर्व अपनी कृषि भूमि विद्या देवी के नाम कर दी। भू-भिलेखों में नामदर्ज होने के बाद पीड़िता के खानदानी भाई ने मांट तहसील में हिस्से के लिए मुकदमा दायर किया। जिसे तहसीलदार ने 27 जून 1977 को रजिस्टर्ड वसीयत के आधार पर खारिज करते हुए पीड़िता के नाम जमीन का नामांतरण करने के आदेश दे दिए। 1977 से 1985 तक लगातार तहसीलदार से राजस्व परिषद लखनऊ तक पांच बार भी वह मुकदमा जीत गईं और छठवीं बार 6 जून 2023 को अपर आयुक्त के न्यायालय से भी उसके पक्ष में आदेश हुए। 19 मई 96 को निद्धा सिंह के नाम से कूट रचित दस्तावेज तैयार किए गए। इसी दौरान उनकी मां विद्या देवी को मृत घोषित दिखा दिया। लगभग 23 वर्ष से अपनी मां के जिंदा होने के सबूत लेकर विद्या देवी के बेटे भटक रहे हैं। मंगलवार को ही विद्यादेवी के बेटे सुनील सोलंकी और दिनेश सोलंकी राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान के समक्ष अपनी फरियाद लेकर पहुंचे जहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें यह कहकर आश्वस्त किया कि उनकी प्राथमिकी दर्ज हो जाएगी। उनके बेटे सुनील सोलंकी ने बताया कि बुधवार को मां को व्हील चेयर पर लेकर वह एसपी सुरक्षा बजरंगबली के यहां पहुंचे लेकिन उनकी प्राथमिकी दर्ज कराना तो दूर, उनकी और मां विद्यादेवी की बात भी नहीं सुनी गई। वहां से जवाब मिला कि मामला राजस्य विभाग का है। पुलिस इसमें कुछ नहीं कर सकती
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