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क्यूआर कोड के साथ चार भाषाओं में ब्रज भूमि का धार्मिक महत्व बताने को लगे संकेतक बोर्ड

ByVijay Singhal

Oct 5, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की पहल पर क्यूआर कोड के साथ चार भाषाओं में सांकेतिक बोर्ड लगाने की शुरुआत बांकेबिहारी की नगरी वृंदावन से हो गई है। टीएफसी वृंदावन में पहला सांकेतिक बोर्ड लगाया गया है। इसका अवलोकन भी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ श्याम बहादुर सिंह ने किया। उक्त बोर्ड मथुरा, वृंदावन, गोकुल, बलदेव, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव में लगाए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने सम्पूर्ण ब्रज के प्रमुख मार्ग और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर 98 संकेतक बोर्ड लगाए जाने का फैसला किया है। यह सांकेतिक बोर्ड ब्रज दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को हिंदी, अंग्रेजी के साथ गुजराती और बंगाली भाषा में विभिन्न प्रमुख मंदिरों का रास्ता बताएंगे। तकनीकी रूप से खास डिजाइन में तैयार इन बोर्ड से क्यूआर कोड भी जोड़ा गया है। इससे न केवल मंदिरों की दूरी की जानकारी मिलेगी बल्कि मंदिर के संक्षिप्त एतिहासिक और धार्मिक महत्व के साथ दर्शन का समय भी पता चल सकेगा। इस क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन करते ही संबंधित मंदिर का संक्षिप्त विवरण सहित उक्त जानकारी मोबाइल पर होंगी। इस सांकेतिक बोर्ड की शुरुआत वृंदावन में टीएफसी से की गई है। इसे उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सी ई ओ श्याम बहादुर सिंह ने परख कर भी देखा।
इस मौके पर मौजूद मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता प्रशांत गौतम ने बताया कि यह सांकेतिक बोर्ड चार भाषाओं में बनाया गया है। इसका दिजायन लोगों को लुभाने वाला है। इसमें हिंदी अंग्रेजी के साथ गुजराती और बंगाली भाषा रहेगी। इन्हीं भाषा वासी लोग यहां सबसे अधिक आते हैं। इसके साथ ही क्यूआर कोड भी रहेगा। इसके स्कैन करते ही मंदिर की संबंधित स्थान से दूरी, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व और दर्शन के समय की जानकारी मिलेगी। उन्होंने बताया कि 10 साल के लिए इन बोर्ड का देखरेख एक निकली कम्पनी को दी गई है।।यही नहीं बोर्ड पर मौजूद क्यूआर कोर्ड के स्कैन करने से मोबाइल गूगल लिंक से भी जुड़ जाएगा, जो मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बताएगा। इससे कोई भी वाहन चालक या श्रद्धालु रास्ते को लेकर भ्रमित नहीं होगा। संकेतक बोर्ड के माध्यम से यह सम्पूर्ण जानकारी बोर्ड पर दर्ज मंदिर के बारे में चार भाषाओं में मिलेगी।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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