हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। नगर आयुक्त और महापौर के बीच हुई सुलह के बाद भी नगरवासियों को विकास को लेकर निराशा हाथ लगी है। महापौर के हस्ताक्षर न होने से विकास कार्य और कोष में जमा करोड़ों का उपयोग न होने पर भाजपा पार्षद दल के नेता चौधरी राजवीर सिंह के नेतृत्व में पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मिला। पार्षदों ने पांच बिंदुओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। मंडलायुक्त ने पार्षदों को जल्द ही समस्या का निदान करने का आश्वासन दिया। पार्षदों ने मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी को सौंपे ज्ञापन में कहा कि लगभग 18 दिन पहले नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 88 के तहत बोर्ड मीटिंग बुलाने की मांग महापौर और नगर आयुक्त से की गई थी। इस संंबंध में संयुक्त हस्ताक्षर पत्र भी दिया गया। नियमों को ताक पर रखकर पत्र के प्राप्त होने के 15 दिन बाद भी बोर्ड मीटिंग नहीं बुलाई गई। पार्षदों ने बताया कि नगर के सभी वार्डों में 15वें वित्त से 60-60 लाख रुपये से विकास कार्य होने हैं। इसके अलावा 25-25 लाख रुपये से राज्य वित्त से कार्य होने हैं। चूंकि नगर निगम के कोष में 15 वें वित्त की धनराशि भरपूर उपलब्ध है। पार्षदों को यह भय सता रहा है यदि 15वें वित्त की राशि से वार्डों में विकास कार्य नहीं कराए गए तो यह लगभग 40 करोेड़ धनराशि शासन को वापस हो जाएगी। पार्षद दल के नेता ने बताया कि जल्द उसमें कार्रवाई नहीं होती है तो पूरी पत्रावली के साथ पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री, ऊर्जामंत्री और प्रमुख सचिव से मिलेंगे। प्रतिनिधिमंडल में नीनू कुंजबिहारी भारद्वाज, नीरज वशिष्ठ, ठाकुर तेजवीर सिंह, बृजेश खरे, राकेश भाटिया और शशांक शर्मा आदि पार्षद मौजूद रहे।
भाजपा पार्षद राजवीर चौधरी ने कहा कि सभी 70 वार्डों में 60-60 लाख रुपये के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। नगर निगम ने सभी वार्डों में कार्यों के एस्टीमेट बनाकर सूचीबद्ध कर दिया है। यह सभी कार्य 15वें वित्त से होने हैं। विकास कार्यों की इस फाइल पर संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर हो चुके हैं, लेकिन महापौर के एक हस्ताक्षर के कारण फाइल अटकी हुई है। यही कारण है कि नगर में विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
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Author: Vijay Singhal
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