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482 साल पहले शालिग्राम शिला से प्रकट हुए थे ठा. राधारमणलालजू, 23 को प्राकट्योत्सव में होगा महाभिषेक

ByVijay Singhal

May 20, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में शालिग्राम शिला से स्वयं प्रकट ठा. राधारमणलालजू का प्राकट्योत्सव 23 मई को धार्मिक अनुष्ठानों संग मनाया जाएगा। सुबह ठाकुरजी का पंचामृत से महाभिषेक होगा। दिव्य श्रृंगार कर आराध्य भक्तों को दर्शन देंगे तो सेवायतों द्वारा दिव्य आरती उतारी जाएगी। सप्तदेवालयों में शामिल ठा. राधारमण लाल जू की महिमा निराली है। राधारमण मंदिर में आज जो आराध्य का विग्रह है। वह काली गंडक नदी के शालिग्राम शिला में ही है। करीब 482 वर्ष पहले खुद ठाकुरजी ने चैतन्य महाप्रभु के अनुयायी आचार्य गोपाल भट्ट गोस्वामी की सेवा से प्रसन्न होकर विग्रह रूप धारण किया था। मंदिर सेवायत वैष्णवाचार्य अभिषेक गोस्वामी बताते हैं करीब पांच सौ वर्ष पहले आचार्य गोपाल भट्ट नेपाल के काली गंडक नदी के दामोदर कुंड में स्नान कर रहे थे। तब उनके पास द्वादश (12) शालिग्राम आ गए। उन्हें आभास हुआ कि हमारे ईष्ट इन्हीं शालिग्राम में छिपे हैं और इन्हें वृंदावन ले जाना है। गोपाल भट्ट सभी शालिग्राम शिला लेकर वृंदावन आ गए। शिला का पूजन करते। जब ठाकुरजी के लिए श्रृंगार सामग्री लोग अर्पित करते, तो वह कहते अभी हमारे ठाकुर जी गर्भस्थ अवस्था में हैं, जब वह प्रकटेंगे, तब श्रृंगार सामग्री लेंगे। उनकी इच्छा थी कि ठाकुरजी का प्राकट्य होता, तो वह भी उनका श्रृंगार करते। गोपाल भट्ट के भाव समझ करीब 482 वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की भोर राधारमणलाल जू शालिग्राम शिला में प्रकटे।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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