हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को वृंदावन और बेलवन आस्था के विराट संगम का साक्षी बना। अल सुबह जैसे ही संत प्रेमानंद महाराज अपने परिकरों के साथ श्रद्धालुओं के बीच जैसे ही नए आश्रम यमुना विहार कुंज पहुंचे तो पूरा परिसर ”राधे-राधे” के जयघोष से गूंज उठा। लाखों श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर अपने गुरु के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के बीच दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश और केरल से पहुंचे दीक्षित परिकरों की मौजूदगी ने महोत्सव को और भव्य बना दिया।परिकरों को संबोधित करते हुए संत प्रेमानंद महाराज ने गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गुरु का सम्मान केवल पूजा-अर्चना से नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने से होता है। उन्होंने कहा, हमें आप लोगों का रुपया नहीं चाहिए। हमारा आपसे कोई सांसारिक संबंध नहीं है। हमारा संबंध केवल भगवत आनंद और प्रियाजी के प्रेम से है। नामजप करते रहिए, किसी का बुरा मत कीजिए और अपने आचरण को श्रेष्ठ बनाइए। महाराज के इन शब्दों पर पूरा पंडाल तालियों और ”राधे-राधे” के जयघोष से गूंज उठा। कार्यक्रम में भजन सम्राट कुंजबिहारी दास ने जब ”लाडो प्यारी है बरसाने वाली है, हमारी लाडली जू’ भजन प्रस्तुत किया तो श्रद्धालु भक्ति रस से सराबोर हो गए।
आश्रम प्रशासन के अनुसार, गुरु पूर्णिमा महोत्सव 29 जुलाई तक चलेगा। निर्धारित कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को छह राज्यों के दीक्षित परिकरों ने दर्शन किए। सुबह तड़के 4:30 बजे यमुना विहार कुंज में सत्संग में गुरुवादी सुनाई तो सुबह सात बजे श्रीहित राधा केलिकुंज आश्रम में चरण पादुका पूजन किया गया। इसके बाद 25 जुलाई को पंजाब, मध्य प्रदेश और झारखंड तथा 26 जुलाई को उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र, आगरा और अलीगढ़ सहित अन्य जिलों से परिकर पहुंचेगे तो 27 को बिहार, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिसा, असम, तेलगांना तथा 28 को वृंदावनवासी शिष्य, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू और गोवा के परिकर मिलेंगे तो 29 जुलाई को विरक्त परिकर मिलेंगे।
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Author: Vijay Singhal
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