हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। रजिस्ट्री कार्यालय में हुई लापरवाही के मामले की जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। बीस पेज की रिपोर्ट में टीम ने यह स्पष्ट कर दिया कि रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने जानबूझकर मूल डीड देने में देरी की। इसके बाद स्टांप एवं पंजीयन मंत्री ने अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। हालांकि 10 दिसंबर को ही जांच टीम ने यह बात साफ कर दी थी और सत्ता एक्सप्रेस ने इस बाबत पहले ही बता दिया था कि इन सब पर अब बड़ी गाज गिर सकती है। अयोध्या मंडल के उप महानिरीक्षक (निबंधन) निरंजन कुमार और उप महानिरीक्षक निबंधन अविनाश पांडेय की जांच समिति ने इस पूरे प्रकरण की मथुरा आकर जांच की थी। टीम सदस्यों ने बताया था कि उन्होंने तीनों अधिकारियों से बंद कमरे में एक-एक घंटे तक पूछताछ की थी। मामले में कुछ अनसुलझे सवालों के जवाब तलाशने के लिए उन्होंने रजिस्ट्री कार्यालय के सात कर्मचारियों से भी पूछताछ कर बयान दर्ज किए गए थे। अन्य जनपदों से संबद्ध तीन अधिकारियों व कर्मचारियों ने अलग अलग बातें बताई थी। इसके बाद 20 पन्नों की रिपोर्ट तैयार करके जांच टीम लखनऊ रवाना हो गई थी। बुधवार को जांच टीम ने स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल को सौंप दी है। इसके बाद मंत्री ने उप निबंधन कार्यालय सदर प्रथम के निवर्तमान अधिकारी अजय कुमार त्रिपाठी, दो कनिष्ठ सहायक प्रदीप उपाध्याय और सतीश चौधरी समेत सात संविदा कर्मचारी को निलंबित कर दिया है। इस रिपोर्ट से यह पता चला है कि अधिकारियों व कर्मचारियों की भ्रष्टाचार की मंशा साफ थी। इसके बाद मंत्री ने यह कार्रवाई की है। यह है मामला तीन दिसंबर को वृंदावन के साधुराम तौरानी ने फ्लैट की रजिस्ट्री के बाद मूल डीड देरी से देने पर स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल से फोन पर निबंधक कार्यालय के अधिकारियों की शिकायत की थी। नियमानुसार, रजिस्ट्री के तत्काल बाद मूल डीड देने का नियम है। इस मामले में स्टांप एवं पंजीयन मंत्री ने रजिस्ट्री कार्यालय के उप निबंधन प्रथम अजय कुमार त्रिपाठी, कनिष्ठ सहायक प्रदीप उपाध्याय और सतीश कुमार चौधरी को विभिन्न जनपदों से संबद्ध कर दिया। पूरे मामले की गहनता से जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई। यह टीम सोमवार सुबह मथुरा पहुंची थी।
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Author: Vijay Singhal
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