हिदुस्तान 24 टीबी न्यूज़ चीफ विजय सिंघल
मथुरा। गोकुल में यमुना में गिर रहे नालों के गंदे पानी का शोधन अब ईको सिस्टम से किया जाएगा। इस तकनीक में बैक्टीरिया और केली के माध्यम से पानी का शोधन होगा। इसके लिए पुणे की एजेंसी ने रूपरेखा तैयार की है, जिसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। नगर निगम मथुरा-वृंदावन ने मथुरा और वृंदावन में यमुना में गिर रहे नालों को टेप किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर रखी है, लेकिन गोकुल में अब भी पांच नालों का गंदा पानी यमुना में जा रहा है। इसकी रोकथाम के लिए पूर्व में गोकुल नगरपंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित ने उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद को एसटीपी की स्थापना कराने के लिए पत्र भेजा था। इस पर विचार विमर्श के बाद परिषद एक अभिनव प्रयोग करने जा रहा है और इसको मूर्तरूप देने के लिए पुणे की सृष्टि इंजीनियरिंग एंड रिसर्च एजेंसी ने गोकुल का सर्वे किया है। तय हुआ है कि गोकुल बैराज के पास होली चबूतरा पर बने तालाब में जल-शोधन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यहीं पर गोकुल के पांचों नाले आकर मिलते हैं और फिर यमुना में गिरते हैं। एजेंसी ने जो कार्ययोजना प्रस्तुत की है, उसमें तीन स्तरों पर पानी का शोधन होगा। पहले स्तर में बड़ी गंदगी को छानकर पानी से अलग किया जाएगा। दूसरे स्तर पर पानी में बायो मिक्सचर यानि बैक्टीरिया डालेंगे। इसके बाद तीसरे स्तर में बांस की जाली से होकर पानी को निकाला जाएगा। बांस की इस जाली पर विशेष प्रकार वे पौधे, केली आदि लगाए जाएंगे, जिनसे पानी की गंदगी दूर होती है। इसके बाद शोधित जल को यमुना में भेजा जाएगा। इन नालों का पानी यमुना में गिर रहा
गोकुल के जिन घाटों पर यमुना में सीधे गंदा पानी डाला जा रहा है, उनमें ठकुरानी घाट, अष्टसखी घाट, मुरलीधर घाट, जगन्नाथ घाट, गणेश मंदिर के पीछे जसोदा घाट और बस्ती का नाला शामिल है। यही नहीं होली चबूतरा पर इन नालों के पानी के लंबे समय से ठहराव के कारण आसपास का भूगर्भ जल भी खराब हो गया है। नागेंद्र प्रताप, सीईओ, उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने कहा इको सिस्टम तकनीक से गोकुल के नालों का जल शोधन कर यमुना में डाला जाएगा। इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
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Author: Vijay Singhal
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