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श्रीजानकी वल्लभ सरकार के अनन्य उपासक थे महन्त वृन्दावनदास महाराज : स्वामी अभिराम दास महाराज

ByVijay Singhal

Dec 15, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा।वृन्दावन में रमणरेती क्षेत्र स्थित फोगला आश्रम में श्रीहनुमान टेकरी वृन्दावन धाम सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान साकेतवासी महन्त वृन्दावनदास महाराज का त्रिदिवसीय साकेत गमनोत्सव अत्यंत श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ महामंडलेश्वर स्वामी अभिराम दास महाराज (हिमालय वासी) के पावन सानिध्य में सम्पन्न हुआ।जिसके अंतर्गत साकेतवासी महन्त वृन्दावनदास महाराज के चित्रपट का पूजन अर्चन वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य महामंडलेश्वरों, महंतों, संतों, विप्रों एवं भक्तों-श्रृद्धालुओं के द्वारा किया गया।साथ श्रीरामर्चन महायज्ञ की भी पूर्णाहुति वैदिक विप्रों द्वारा की गई।
इस अवसर पर आयोजित संत-विद्वत सम्मेलन में अपने विचार व्यक्त करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी अभिराम दास महाराज (हिमालय वासी) ने कहा कि साकेतवासी महन्त वृन्दावनदास महाराज श्रीरामानंदीय संप्रदाय की बहुमूल्य निधि थे।वह वृन्दावन श्रीहनुमान टेकरी स्थित मंदिर ठाकुर श्रीजानकी वल्लभ सरकार के अनन्य उपासक थे।
हनुमान टेकरी आश्रम के महंत ओंकार दास महाराज एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि श्रीहनुमान टेकरी आश्रम श्रीधाम वृन्दावन का अत्यंत प्राचीन व सिद्ध स्थान है।यहां के सभी पूर्ववर्ती महंतों ने अपनी साधना की शक्ति से असंख्य व्यक्तियों को प्रभु भक्ति के मार्ग से जोड़कर उनका कल्याण किया है। शालिग्राम कुटी आश्रम के महंत रमणरेती दास महाराज एवं महामंडलेश्वर महंत दीनबन्धु दास महाराज(दिल्ली) ने कहा कि साकेतवासी महन्त वृन्दावनदास महाराज सहजता, सरलता, उदारता एवं परोपकारिता आदि अनेकों सद्गुणों की खान थे।उन जैसी पुण्यात्माओं से ही पृथ्वी पर धर्म व अध्यात्म का अस्तित्व है।
संत-विद्वत सम्मेलन में महंत परमेश्वरदास महाराज, महामंडलेश्वर नवल किशोर दास महराज (दिल्ली), महंत श्यामसुंदर दास महाराज (ओंकारेश्वर), महंत रविकरण दास महाराज, डॉ. राधाकांत शर्मा, महंत दीनदयाल दास महाराज, मेजर उमेश सिंह (राजस्थान) आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।संचालन महंत रमणरेती दास महाराज ने किया।इससे पूर्व हनुमान टेकरी आश्रम के महंत ओंकार दास महाराज ने सैकड़ों महामंडलेश्वरों व महंतों का सम्मान किया।।महोत्सव का समापन संत, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं झंरा भंडारे के साथ हुआ।जिसमें हजारों संतों, विप्रों व निर्धनों को खाद्य सामग्री एवं कंबलों का वितरण किया गया।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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