हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में यही तो अपने आराध्य के प्रति आस्था है। ठाकुर जी की भक्ति में डूबी एक दिव्यांग युवती श्रीहरि शालिग्राम के साथ ब्याह रचा दिव्यात्म हो गई। शुक्रवार को वैदिक सनातनी परंपरा से विवाह हुआ। लग्न लिखी, बरात चढ़ी, देहरी पूजन हुआ, ब्याहुला गाया गया। …और पाणिग्रहण होते ही, अपने पैरों पर खड़ी न हो सकने वाली शीतल ने ठाकुर की सखी होने का परमपद पा लिया। राधा आर्चिड निवासी प्रमाेद अग्रवाल सराफा कारोबारी हैं। उनके दो बेटे गौरव व सौरभ अग्रवाल व एक 25 वर्षीय पुत्री शीतल हैं। शीतल चलने-फिरने में अक्षम है। साफ-साफ बोल भी नहीं पाती है। अधिकांश समय हरिभजन में डूबी रहने वाली शीतल का व्हीलचेयर ही सहारा है। साधु-संतों संग सत्संग के दौरान शीतल के पिता प्रमोद अग्रवाल ने पीड़ा व्यक्त की कि काश वह अपनी पुत्री का कन्यादान कर पाते। साधु-संतों ने बिटिया का ब्याह श्रीशालिग्राम संग करने का विचार दिया। फिर क्या था। अपनी बेटी के हाथ पीले करने की इच्छा लिए एक पिता, हरिभजन में डूबी उनकी बिटिया और दूल्हे के रूप में इनकी पीड़ा हरने वाले श्रीहरि शालिग्राम।शीतल के स्वजन ने शादी की तैयारियां कीं। निमंत्रण पत्र बंटवाए गए। 19 फरवरी को प्रात: दस बजे सरस्वती कुंड पर शीतल का लग्न लेखन हुआ। 21 फरवरी को मसानी लिंक रोड स्थित ट्यूलिप गार्डन में विवाह का दिव्य व भव्य आयोजन हुआ। दोपहर 11 बजे महाविद्या निवासी मुरलीधर चतुर्वेदी द्वारा सेवित श्रीशालिग्राम व ठाकुरजी के स्वरूप रथ में सवार हो बरात लेकर निकले। बैंड, नफीरी व शहनाई की धुनों पर झूमते हुए करीब तीन सौ बराती इस अद्भुत बरात में शामिल थे। राधा ऑर्चिड से बरात ट्यूृलिप गार्डन पहुंची। शीतल ने अपने प्रियतम को कनखियों से निहारा। 12 बजे देहरी पूजन हुआ। पांच सौ से अधिक संतों को प्रसादी ग्रहण कराई गई। संत महात्माओं की पावन उपस्थिति के बीच वैदिक रीतियों के साथ पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ।
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Author: Vijay Singhal
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