हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के गोवर्धन में हर वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर मेला लगता है। गुरु पूर्णिमा के नाम से विख्यात इस पूर्णिमा को यहां मुड़िया पूर्णिमा कहा जाता है। गोवर्धन धाम में मुड़िया पूर्णिमा मेला आज के युग में गुरु शिष्य परम्परा का अनूठा उदाहरण है। हर वर्ष मुड़िया पूर्णिमा पर 8 दिन यहां करोड़ों भक्त 21 किलोमीटर की गिर्राज जी की परिक्रमा करने आते हैं। मुड़िया पूर्णिमा मेला पर इस प्रथा को आज भी चैतन्य महाप्रभु के परम शिष्य सनातन गोस्वामी के अनुयाई निभाते हैं। सन 1515 में चैतन्य महाप्रभु ब्रज में आए। कुछ समय ब्रज में व्यतीत करने के बाद वह वापस बंगाल चले गए। चैतन्य महाप्रभु ने बंगाल जा कर 1516 में श्री पाद सनातन गोस्वामी को भेजा। वृंदावन में रह कर भगवान का भजन करने लगे। एक दिन उन्होंने गिर्राज जी की परिक्रमा का संकल्प लिया और गोवर्धन पहुंच गए। श्री पाद सनातन गोस्वामी गोवर्धन के चकलेश्वर मंदिर पर रहने लगे और गिर्राज जी की परिक्रमा करते थे। लेकिन जब उनका शरीर बुजुर्ग अवस्था में पहुंचने लगा और 1558 ईसवी में गुरु पूर्णिमा के दिन गोलोक गमन कर लिया। विरह में उनके शिष्यों और अनुयाइयों ने सर मुड़ाकर मानसी गंगा में स्नान किया और फिर दी गोवर्धन की परिक्रमा। तभी से यह मुड़िया पूर्णिमा मेला के नाम से प्रसिद्ध हो गया। रविवार को श्री राधा श्याम सुंदर मंदिर में मुड़िया महंत रामकृष्ण दास, श्याम सुंदर दास, अरुण दास, चेतन दास, हजारी दास, रविदास, गोपाल दास, राधेश्याम दास, हरेकृष्णा दास, साधना दास एवं अन्य बंगाली एवं विदेशी भक्तों ने मुंडन कराया। इसके अलावा राधा गोविंद मंदिर, इमली तला हनुमान मंदिर, सिद्ध बाबा, चैतन्य महाप्रभु, तीन कौड़ी, नया मंदिर में भी साधु-संतों ने मुंडन कराया। इस दौरान शिष्यों और अनुयायियों ने संकीर्तन भी किया। मुड़िया पूर्णिमा के उपलक्ष्य में सोमवार को सुबह प्रमुख मंदिरों और आश्रमों में गुरु पूजा होगी। श्री राधा श्याम सुंदर मंदिर में मुड़िया संत रामकृष्ण दास के निर्देशन में सुबह 7 बजे गुरु पूजा तथा 10 बजे सनातन गोस्वामी के अनुयायी साधु-संतों की मुड़िया संकीर्तन शोभायात्रा निकाली जाएगी।
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Author: Vijay Singhal
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