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वृंदावन में ऑनलाइन रूम बुक कर रहे हैं तो रहें सतर्क, साइबर ठगों ने बनाई होटल-गेस्ट हाउस की फर्जी वेबसाइट

ByVijay Singhal

Jan 4, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल

मथुरा। वृंदावन में ठाकुर बांकेबिहारी की नगरी में हर दिन हजारों श्रद्धालु मंदिरों के दर्शन करने आ रहे हैं। शहर में आने के लिए श्रद्धालु ठहरने के लिए होटल, गेस्टहाउसों में कमरे भी बुकिंग करवाते हैं। ताकि यहां आने पर उन्हें ठहरने में दिक्कत न हो। अधिकतर तीर्थस्थलियों और पर्यटन क्षेत्राें में होटल, गेस्टहाउसों में कमरों के लिए आनलाइन बुकिंग करवाकर ही पहुंचते हैं। बस इसी का लाभ उठाने के लिए साइबर अपराधियों ने धाेखाधड़ी का नया तरीका अपनाया है। गेस्टहाउसों के नाम की वेबसाइट बनाकर देश के विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए कमरा बुकिंग के नाम पर ठगी कर रहे हैं। जबकि जिन गेस्टहाउसों के लिए श्रद्धालु अपना कमरा बुक करवाते हैं, बुकिंग करने वालों का उस गेस्टहाउस से दूर दूर तक कोई संबध ही नहीं होता। जब श्रद्धालु गेस्टहाउस में ठहरने के लिए पहुंचता है, तो उसे खुद के साथ हुई ठगी का एहसास होता है। पर्व-उत्सव ही नहीं वीकेंड के दिनाें में लोग अपने कमरे इन वेबसाइटों पर दिए नंबर पर संपर्क कर बुक करवा लेते हैं। एडवांस के नाम पर पांच हजार या दस हजार ही नहीं 15 हजार रुपए तक का एडवांस श्रद्धालुओं से आनलाइन ले रहे हैं। इन साइबर अपराधियों के जाल में फंसे श्रद्धालु जब इसी नाम के गेस्टहाउस में ठहरने पहुंचते हैं, तो खुद गेस्टहाउस संचालक ठगा महसूस करते हैं। चूंकि श्रद्धालु के पास गेस्टहाउस में बुकिंग के लिए किए गए एडवांस भुगतान की रसीद की कापी होती है। जिससे गेस्टहाउस संचालक पूरी तरह बेखबर हैं। फोगला आश्रम में प्रबंधक जेपी यादव ने बताया पिछले एक साल से आए दिन ऐसे श्रद्धालु आ रहे हैं, जिन्होंने फोगला आश्रम के नाम से बनी वेबसाइट पर अपनी बुकिंग के लिए पैसे जमा करवा दिए। जबकि फोगला आश्रम में एडवांस बुकिंग के लिए न तो कोई वेबसाइट ही है और न ही हम बुकिंग के लिए हम आनलाइन भुगातन ही लेते हैं। बताया कई श्रद्धालु अपने भुगतान के प्रिंटआउट लेकर गेस्टहाउस पहुंचते हैं। जब बुकिंग करने वाले लोगों से वेबसाइट पर दिए नंबर पर बात की जाती है, तो अभद्रता पर उतर आते हैं और गाली गलौज करते हैं। बताया कि पुलिस से भी इसकी शिकायत की है। लेकिन, अब तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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